जैतपुर पुलिस का अमानवीय चेहरा , खून से लथपथ लगता रहा गुहार , फिर भी नहीं लिखा गया FIR
जैतपुर | ख़बर टैप
शहडोल जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। रसमोहनी निवासी सतेंद्र बारगाही ने आरोप लगाया है कि वह अपने खेत की देखरेख के लिए गया था। इसी दौरान टिकुरी निवासी पूरान साहू एवं उनके पुत्र परमानंद साहू ट्रैक्टर लेकर उसके खेत पर पहुंचे।
पीड़ित के अनुसार, दोनों खेत के बीचों-बीच ट्रैक्टर निकाल रहे थे, जिससे खेत में खड़ी फसल को नुकसान होने की आशंका थी। सतेंद्र बारगाही ने उनसे ट्रैक्टर खेत के किनारे से निकालने का आग्रह किया। आरोप है कि इसी बात पर विवाद बढ़ गया और परमानंद साहू ने ट्रैक्टर से उसे कुचलने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों ने कथित रूप से मारपीट की, गाली-गलौज की तथा जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित का कहना है कि घटना में उसे गंभीर चोटें आईं और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
पीड़ित का आरोप है कि घटना की शिकायत लेकर वह जैतपुर थाने पहुंचा, लेकिन खून से लथपथ हालत में होने के बावजूद उसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज नहीं की गई। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 115(2) (गंभीर चोट), धारा 324 (संपत्ति को नुकसान), धारा 296 (गाली-गलौज), धारा 351 (आपराधिक धमकी), धारा 329 (आपराधिक अनधिकार प्रवेश) एवं धारा 3(5) (साझा आपराधिक मंशा) जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। हालांकि अंतिम धाराओं का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जैतपुर क्षेत्र में अपराधों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि हाल के दिनों में अवैध उत्खनन जैसे मामलों को उजागर करने वाले एक पत्रकार के विरुद्ध भी NCR दर्ज की गई थी। वहीं क्षेत्र में गांजा प्रकरण, वाहनों में तोड़फोड़ तथा पशु तस्करी जैसे मामलों को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। इन सभी मामलों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना शेष है।
अब इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या पुलिस अधीक्षक सतेंद्र बारगाही को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे?
क्या जैतपुर पुलिस पीड़ित की शिकायत पर विधिसम्मत FIR दर्ज करेगी?
यदि FIR दर्ज करने में लापरवाही हुई है, तो क्या जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी?
क्या बढ़ते अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
क्या कानून में अपराध करने वाला संरक्षण पाएगा या फरियाद करने वाला न्याय?
यदि तकनीकी कारणों से FIR दर्ज नहीं हुई, तो उसी दौरान अन्य शिकायतों पर कार्रवाई कैसे हुई?
यदि फरियादी का मोबाइल पुलिस द्वारा लिया गया, तो क्या वह वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप था?
अब निगाहें केवल पुलिस पर ही नहीं, बल्कि पंचायत विभाग पर भी हैं। यदि पंचायत सचिव पर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो क्या जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत स्तर पर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी?
क्या ऐसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे, या मामला यूँ ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
नोट: यह समाचार पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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