Updated On: 14 Oct, 2025

“बिहार चुनाव में बीजेपी की पहली चाल — 71 सीटों पर उम्मीदवार घोषित, NDA में सियासी भूकंप!”

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने आज बड़ा दांव खेला है। मंगलवार दोपहर पार्टी ने 71 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इस लिस्ट के साथ ही राज्य की राजनीति में सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है, क्योंकि यह फैसला NDA के अंदर चल रहे सीट बंटवारे के तनाव के बीच आया है।

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की इस लिस्ट में राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के नाम शामिल हैं। सम्राट चौधरी को तारापुर, जबकि विजय सिन्हा को लखीसराय से टिकट मिला है। इसके अलावा राम कृपाल यादव (दानापुर), प्रेम कुमार (गया), तारकिशोर प्रसाद (कटिहार), मंगल पांडे (सीवान), और आलोक रंजन झा (सहरसा) जैसे दिग्गजों को भी मैदान में उतारा गया है।

राजनीतिक गलियारों में इस कदम को बीजेपी का “पावर मूव” माना जा रहा है। दरअसल, NDA के भीतर सीट बंटवारे को लेकर पिछले कई दिनों से खींचतान जारी थी। रविवार को दिल्ली में हुई लंबी बैठकों के बाद तय हुआ कि भाजपा और जेडीयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी, जबकि LJP (रामविलास) को 29, HAM और RLM को 6-6 सीटें मिली हैं।

लेकिन इस समझौते के बाद भी सब कुछ ठीक नहीं है। JDU खेमे में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इस्तीफे की पेशकश की है, जबकि मंत्री रत्नेश सदा और पूर्व विधायक गोपाल मंडल ने नीतीश आवास के बाहर धरना दे दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि “टिकट बंटवारे में नीतीश की राय को नजरअंदाज किया गया।”

बीजेपी ने जब यह सूची जारी की, उसी वक्त JDU नेताओं की बैठक जारी थी — और तभी यह खबर आ गई। अब सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी ने जानबूझकर NDA में अपनी ताकत दिखाने के लिए यह कदम उठाया?

वहीं, बिहार में दो चरणों में मतदान होगा — पहला चरण 6 नवंबर को, और दूसरा 11 नवंबर को, जबकि गिनती 14 नवंबर को होगी। कुल 7.42 करोड़ मतदाता इस बार अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि “बीजेपी की यह पहली सूची एक संदेश है — पार्टी अब गठबंधन की मजबूरियों में नहीं, अपनी शर्तों पर चुनाव लड़ेगी।”
दूसरी ओर विपक्ष महागठबंधन ने इसे “NDA के भीतर विद्रोह की शुरुआत” बताया है।

अब सबकी नज़र नीतीश कुमार के अगले कदम पर है — क्या वे इस थप्पड़ जैसे झटके को बर्दाश्त करेंगे या बिहार की राजनीति में फिर एक नया समीकरण बनेगा?