आग में सिसकती जिंदगियाँ: जैसलमेर बस हादसे ने ली 21 लोगों की जान, नॉन-AC बस को AC बनाना पड़ा भारी"
जैसलमेर की बस अचानक आग का गोला कैसे बनी? 21 जिंदगियाँ चंद मिनटों में राख, अब दो अफसरों पर गिरी गाज — क्या ये सिर्फ हादसा था या लापरवाही का जाल?
राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार को हुई भीषण बस अग्निकांड में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक DTC सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नीलाल को निलंबित कर दिया है। यह वही अधिकारी थे जिन्होंने उस बस की बॉडी को अप्रूव किया था जो आग की चपेट में आई।
जांच में सामने आया कि बस को नॉन-AC के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था, लेकिन मालिक ने उसे AC स्लीपर में मॉडिफाई करवा दिया — जिसकी भनक परिवहन विभाग को नहीं लगी। अब ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) भी इस पूरे मामले की जांच करेगी।
हादसे में झुलसे 10 वर्षीय यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल, जोधपुर में 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
मृत पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ पहली FIR जैसलमेर सदर थाने में दर्ज कराई है।
हादसे की जांच में सामने आए बड़े खुलासे
1. तीन महीने में बनी थी बस: बस की बॉडी मई में अप्रूव हुई थी, 1 अक्टूबर को रजिस्ट्रेशन हुआ और 14 अक्टूबर को हादसा हो गया।
2. बस में रखे थे पटाखे: शॉर्ट सर्किट के अलावा बस की डिग्गी में रखे पटाखों से आग लगने की आशंका जताई जा रही है।
3. पीएम की घोषणा: मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी।
4. मंत्री का बयान: गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा — “एक ही दरवाजा था, इसलिए लोग फंस गए। कई यात्री पूरी तरह खाक हो गए।”
हादसे की भयावह तस्वीरें
सेना की मदद से 19 शव जैसलमेर से जोधपुर लाए गए।
बस के अंदर से कई बॉडी पार्ट्स को अलग-अलग जगहों से एकत्र किया गया।
DNA सैंपलिंग के ज़रिए शवों की पहचान प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार रात आर्मी कैंट में जली बस का निरीक्षण किया।

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