गुजरात में सभी मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, 17 अक्टूबर को नए मंत्रिमंडल का गठन — बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत
गुजरात की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को छोड़कर राज्य के सभी मंत्रियों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के इस्तीफे राज्यपाल को सौंप दिए हैं। अब 17 अक्टूबर को नए मंत्रिमंडल का गठन होगा। माना जा रहा है कि इसमें कई नए चेहरों को शामिल किया जाएगा, जबकि कुछ पुराने नेताओं को भी दोबारा मौका मिल सकता है।
राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव और 2026 के नगर पंचायत चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम भाजपा की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। 2022 में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन उसके बाद सत्ता-विरोधी लहर और उपचुनावों में हार ने नेतृत्व को सोचने पर मजबूर कर दिया। जून 2025 में विसावदर और कड़ी सीट पर हुए उपचुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था और संगठन के निर्देशों पर काम नहीं हो रहा था। भाजपा अब ऐसे नए नेताओं को मौका देना चाहती है जो संगठन के साथ तालमेल बिठाकर जनता के बीच सक्रिय भूमिका निभा सकें।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मत्स्य पालन मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी, पंचायत मंत्री बच्चूभाई खाबर, वन मंत्री मुकेश पटेल और खाद्य आपूर्ति मंत्री भीखूसिंह परमार समेत कई मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है। वहीं, कांग्रेस से भाजपा में आए हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और अर्जुन मोढवाड़िया जैसे नेताओं को मंत्री पद मिल सकता है।
इसके अलावा, तीन महिला विधायकों—रिवाबा जाडेजा, दर्शिता शाह और संगीता पाटिल—के नाम भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल हैं। गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को प्रमोशन देकर कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
गुजरात विधानसभा में कुल 182 विधायक हैं और अधिकतम 27 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में नए मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक निष्ठा को प्राथमिकता दी जाएगी।

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