Updated On: 21 Oct, 2025

मेरा सब थाना सेट है रेत माफिया अफसर अली का घमंडी ऐलान! खुलेआम रेत का परिवहन प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा माफिया राज

शहडोल।

जैतपुर थाना क्षेत्र में रेत माफिया मोहम्मद अफसर अली और उसका बेटा इरफान अली इन दिनों कानून और प्रशासन दोनों को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। क्षेत्र के तितरा निवासी अफसर अली का आतंक इस कदर फैल गया है कि अब वह खुलेआम कह रहा है — “मेरा सब थाना सेट है, जिसका जो करना है कर लो!” यह बयान न केवल प्रशासन के प्रति उसकी गुंडागर्दी को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस तरह रेत माफिया बेखौफ होकर शासकीय जमीन और नदी तटों को लूट रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अफसर अली और उसका बेटा इरफान पिछले कई महीनों से नदी किनारे अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का काला कारोबार चला रहे हैं। प्रशासन की आंखों के सामने दर्जनों ट्रैक्टर और मिनी ट्रक हर रोज रेत से भरे निकलते हैं, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है। ग्रामीणों का कहना है कि जो भी इस अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे धमकियां दी जाती हैं। हाल ही में एक युवक विक्रम अगरिया पर लाठी डंडा वा धार दार हथियार से हमला भी इसी गिरोह ने किया, क्योंकि उसने नदी किनारे मछली पकड़ने की हिम्मत की थी।

यहां तक कि शासकीय जमीन पर कब्जा जमाकर अफसर अली ने अवैध रेत का गोदाम भी बना लिया है। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अमला मूकदर्शक बना हुआ है। ऐसा लगता है मानो अफसर अली का “सेटिंग तंत्र” सच में सक्रिय है — तभी तो पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारी मौके से अनजान बने बैठे हैं।

ग्रामीणों का गुस्सा अब उबाल पर है। लोगों का कहना है कि अगर रेत माफिया पर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अफसर अली और उसके बेटे इरफान के खिलाफ एनएसए जैसी कठोर कार्रवाई की जाए ताकि अन्य माफिया भी सबक लें।

रेत माफिया का यह दुस्साहस अब प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर सरकार अवैध रेत उत्खनन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत यह है कि अफसर अली जैसे माफिया उसी प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं।

अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो जैतपुर की रेत जल्द ही माफिया के कब्जे में पूरी तरह समा जाएगी — और “सेटिंग” की यह संस्कृति जनविरोध का सबसे बड़ा उदाहरण बन जाएगी।

👉 सवाल यही है:

क्या प्रशासन अफसर अली के “सेटिंग सिंड्रोम” को तोड़ पाएगा,

या फिर कानून एक बार फिर रेत माफिया के सामने नतमस्तक रहेगा?