Updated On: 23 Oct, 2025

चौकी प्रभारी के ‘आपस में निपटा लो’ के बाद मचा मातम — दबंगों ने दो भाइयों को मौत के घाट उतारा, गुस्से में उबल उठा शहर

मध्य प्रदेश के शहडोल ज़िले के बलबहरा गांव में बुधवार की रात खून से सनी एक ऐसी वारदात सामने आई जिसने पूरे जिले को हिला दिया। दो सगे भाइयों — राहुल तिवारी और राकेश तिवारी — की निर्मम हत्या के बाद गांव में आक्रोश और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने दबंगों की धमकियों की शिकायत चौकी प्रभारी से की थी, तो जवाब मिला — “आपस में निपटा लो, पुलिस क्यों बीच में पड़े।” और कुछ ही घंटों बाद, दोनों भाई हमेशा के लिए खामोश हो गए।


गांव में तनाव का माहौल है। गुस्साए ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। घंटों तक रीवा-शहडोल मार्ग जाम रहा, जिससे लंबा जाम लग गया। लोगों ने चौकी प्रभारी को निलंबित करने और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।


मृतकों के पिता का कहना है — “हमने बार-बार पुलिस से मदद मांगी, लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी। अगर कार्रवाई समय पर होती, तो आज मेरे बेटे जिंदा होते।” यह कहते हुए उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।


यह मेरा आखिरी बयान है'

इस बीच घायल राहुल तिवारी ने मरने से पहले मोबाइल में एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने आरोपियों के नाम लेते हुए कहा, “यह मेरा आखिरी बयान है, इसे ही मेरा बयान माना जाए।” घटना के बाद पुलिस अधीक्षक ने गंभीरता दिखाते हुए केशवाही चौकी प्रभारी आशीष झारिया को लाइन हाजिर कर दिया है। घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी है।


घटना के बाद गांव में मातम पसरा है। महिलाएं रो-रोकर बेहाल हैं, और बच्चे अपने पिता-चाचा के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। आरोप है कि जब घायल भाइयों को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब रास्ते में भी पुलिस ने वाहन रोककर पूछताछ में वक्त गवां दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।


पुलिस प्रशासन अब हरकत में आया है। एएसपी ने जांच के आदेश दिए हैं और पांच नामजद आरोपियों सहित 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। वहीं, चौकी प्रभारी की भूमिका भी जांच के घेरे में है।


स्थानीय लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। “अगर ऐसे अधिकारी बच गए, तो किसी की जान सुरक्षित नहीं,” एक प्रदर्शनकारी ने कहा।


फिलहाल, गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि जब इंसाफ की पुकार चौकी तक पहुंच चुकी थी, तो कानों पर जूं क्यों नहीं रेंगी? दो भाइयों की जान चली गई, पर जवाबदेही अब भी अधर में लटकी है।