कर्नाटक हाई कोर्ट से सिद्धारमैया सरकार को बड़ा झटका, RSS कार्यक्रमों पर रोक के आदेश पर लगी अंतरिम रोक
✍️लेखन: देवकांत मिश्रा
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को मंगलवार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार द्वारा निजी संगठनों के कार्यक्रमों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी सरकार को नागरिकों या निजी संस्थाओं के संवैधानिक अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
यह फैसला न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार, गृह विभाग और हुबली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2025 को होगी। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अन्य संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत बताया है।
सरकार का विवादित आदेश
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों — जैसे स्कूल, कॉलेज और संस्थागत परिसरों — में किसी भी निजी या सामाजिक संगठन को कार्यक्रम करने से पहले विभागाध्यक्ष से लिखित अनुमति लेने का निर्देश दिया था। बिना अनुमति के इन परिसरों में सभा, बैठक या सांस्कृतिक कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी गई थी।
इस आदेश को लेकर विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा था। बीजेपी और कई सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया था कि यह कदम RSS की शाखाओं और उसके सामाजिक कार्यक्रमों को रोकने की साजिश है।
याचिका और कोर्ट की टिप्पणी
सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पुनश्चैतन्य सेवा संस्था ने दायर की थी। संस्था की ओर से दलील दी गई कि सरकार का यह कदम निजी संगठनों के वैध गतिविधियों और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
अदालत ने याचिकाकर्ता की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि सरकार नागरिकों के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) के तहत मिले अधिकारों — यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार — को सीमित नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
आगे की राह
कोर्ट द्वारा लगाई गई यह अंतरिम रोक अस्थायी है, लेकिन इससे संबंधित संगठनों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। सरकार को अब अपने आदेश के औचित्य को साबित करने के लिए कोर्ट में ठोस तर्क पेश करने होंगे।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम है, क्योंकि इससे राज्य सरकार की नीति और संघ से जुड़े विवादों पर कांग्रेस के रुख की परीक्षा होगी।

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