खौफनाक तूफान ‘मेलिसा’: US एयरफोर्स पहुंची तूफान की आंख में, रिकॉर्ड किए डरावने नज़ारे
अमेरिकी वायुसेना के ‘हुर्रिकेन हंटर्स’ ने इतिहास रच दिया है। इस टीम ने श्रेणी-5 के बेहद शक्तिशाली तूफान ‘मेलिसा’ की आंख में प्रवेश कर उसके भीतर का दृश्य रिकॉर्ड किया। मिशन का उद्देश्य अमेरिकी नेशनल हुर्रिकेन सेंटर के लिए वास्तविक आंकड़े जुटाना था ताकि तूफान की दिशा, गति और ताकत का सटीक अनुमान लगाया जा सके। यह वही तूफान है जिसने जमैका और क्यूबा में भारी तबाही मचाई है और कैरेबियन क्षेत्र में दहशत फैला दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना का विशेष विमान सूर्योदय के बाद दक्षिण-पूर्व दिशा से तूफान में दाखिल हुआ। अंदर का दृश्य बेहद डरावना था—चारों ओर मोटे बादल, तेज़ हवाओं का शोर और बीच में एक शांत-सा केंद्र। यही तूफान की “आंख” कहलाती है। टीम ने बताया कि जब विमान अंदर पहुंचा तो उन्हें “स्टेडियम इफेक्ट” दिखाई दिया, यानी बादल ऊपर की ओर झुककर किसी विशाल गुंबद जैसी आकृति बना रहे थे। यह दृश्य मानो आसमान के भीतर बने किसी भंवर जैसा लग रहा था।
वायुसेना ने सोशल मीडिया पर जो वीडियो साझा किया, उसमें बिजली की चमक से बादलों की दीवारें बार-बार जगमगाती दिखीं। नीचे समुद्र की लहरें अलग-अलग दिशाओं में टकरा रही थीं, मानो हर लहर अपनी राह में संघर्ष कर रही हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि तूफान के केंद्र में हवा की गति लगभग 282 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच चुकी थी, जो इसे इस सदी के सबसे ताकतवर तूफानों में से एक बनाती है।
अमेरिकी नेशनल हुर्रिकेन सेंटर के मुताबिक, मेलिसा 1851 के बाद से जमैका से टकराने वाला सबसे प्रचंड तूफान है। फिलहाल यह लगभग 6 से 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह बहामास और बरमूडा की ओर बढ़ सकता है। जमैका में पहले ही आपात स्थिति लागू की जा चुकी है। सरकार ने 800 से ज्यादा राहत शिविर खोल दिए हैं और तटीय इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटे बेहद संवेदनशील हो सकते हैं क्योंकि तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश से बाढ़, भूस्खलन और पेड़ गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। अब तक कैरेबियन देशों में सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और बिजली आपूर्ति व्यापक रूप से बाधित है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसे तूफानों की तीव्रता बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह स्थिति और भयावह हो सकती है।

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