Updated On: 30 Oct, 2025

खैबर पख्तूनख्वा में बड़ा धमाका: पाकिस्तानी सेना के काफिले को बनाया निशाना, कैप्टन समेत 6 जवान ढेर

पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गुरुवार को आतंकवादियों ने एक बार फिर पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया। अफगान सीमा से सटे कुर्रम जिले में सेना के काफिले पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से हमला किया गया, जिसमें एक कैप्टन समेत 6 जवानों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह धमाका तब हुआ जब सेना का काफिला आतंकियों से मुठभेड़ के बाद लौट रहा था।

IED विस्फोट में उड़ा दिया गया काफिला
पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के अनुसार, यह हमला कुर्रम जिले के सुल्तानी इलाके में हुआ। सेना के जवान वहां प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रहे थे। मुठभेड़ में 7 आतंकवादी मारे गए थे। लेकिन जैसे ही काफिला डोगर इलाके के पास पहुंचा, सड़क किनारे लगाए गए IED में जोरदार विस्फोट हो गया। धमाका इतना भीषण था कि कई वाहनों के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही कई जवानों की जान चली गई।

इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी
धमाके के बाद पूरे इलाके को सेना ने घेर लिया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर भेजा गया है और आतंकियों की तलाश में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सेना ने कुर्रम के कई इलाकों में कर्फ्यू जैसा माहौल बना दिया है ताकि आतंकियों को भागने का मौका न मिले। घायलों को पास के सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।

TTP की बढ़ती सक्रियता से बढ़ी चिंता
2022 में पाकिस्तान सरकार और TTP के बीच संघर्षविराम टूटने के बाद से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अफगानिस्तान से सटी सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ में तेजी आई है। आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक केवल खैबर पख्तूनख्वा में ही आतंकवादी हमलों में 298 लोगों की जान जा चुकी है।

सरकार पर बढ़ा दबाव
लगातार हो रहे हमलों से पाकिस्तान सरकार और सेना की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष का आरोप है कि अफगान सीमा नीति की विफलता और TTP के साथ असफल वार्ता ने देश को और अस्थिर बना दिया है। वहीं, ISPR का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक देश को इस “खतरे की जड़” से मुक्त नहीं किया जाता।

यह ताजा हमला पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को एक बार फिर उजागर करता है, जहां हर बीतते महीने के साथ हिंसा का दायरा बढ़ता जा रहा है।