Updated On: 02 Nov, 2025

अब नहीं मिलेगी सिगरेट… सिगरेट खरीदने पर ‘लाइफटाइम रोक’, कानून जानकर रह जाएंगे हैरान!

लाइफटाइम बैन: नई पीढ़ी अब जिंदगीभर नहीं पी सकेगी सिगरेट, जानिए क्यों लिया गया फैसला

दुनिया के सबसे खूबसूरत द्वीप देशों में शुमार मालदीव अब एक ऐतिहासिक कदम की वजह से सुर्खियों में है। मालदीव सरकार ने धूम्रपान पर ऐसा ‘लाइफटाइम बैन’ लगाया है, जो न सिर्फ अपने नागरिकों पर, बल्कि वहां आने वाले विदेशी पर्यटकों पर भी लागू होगा। यह फैसला 1 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गया है।

नए कानून के तहत 1 जनवरी 2007 के बाद जन्मे किसी भी व्यक्ति को अब तंबाकू खरीदने, इस्तेमाल करने या बेचने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि आने वाली पूरी पीढ़ी अब मालदीव में सिगरेट या किसी भी तरह का तंबाकू उत्पाद नहीं खरीद सकेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम देश को “Tobacco-Free Generation” बनाने की दिशा में उठाया गया है।

मालदीव स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति मोहम्मद मुईज्जू की हेल्थ इनिशिएटिव का हिस्सा है। मंत्रालय ने साफ किया कि यह कानून सिर्फ स्थानीय नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि देश में आने वाले पर्यटकों पर भी लागू होगा। यानी अगर कोई सैलानी 2007 के बाद जन्मा है, तो वह भी मालदीव में धूम्रपान नहीं कर सकेगा।

सरकार ने दुकानदारों और विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे किसी भी ग्राहक को तंबाकू उत्पाद बेचने से पहले उसकी उम्र की जांच करें। अगर कोई विक्रेता नाबालिग या प्रतिबंधित आयु वर्ग को सिगरेट या बीड़ी बेचते पकड़ा गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। नियम तोड़ने पर 50,000 मालदीवियन रूफिया (लगभग 3,200 अमेरिकी डॉलर) तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

मालदीव पहले से ही ई-सिगरेट और वेपिंग डिवाइस पर पूरी तरह से रोक लगा चुका है। अब इस नए कानून के बाद वह दुनिया का पहला देश बन गया है, जिसने एक पूरी पीढ़ी के लिए तंबाकू पर स्थायी रोक लगा दी है।

दिलचस्प बात यह है कि न्यूजीलैंड ने 2022 में इसी तरह का कानून पारित किया था, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। वहीं ब्रिटेन में फिलहाल ऐसा प्रस्ताव चर्चा में है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मालदीव का यह कदम आने वाले समय में अन्य देशों को भी प्रेरित कर सकता है, क्योंकि इससे न सिर्फ धूम्रपान की दर घटेगी, बल्कि कैंसर, हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों में भी कमी आएगी।

इस फैसले से मालदीव ने दुनिया के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है कि कैसे एक छोटा देश भी वैश्विक स्वास्थ्य नीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।