Updated On: 03 Nov, 2025

जैतपुर क्षेत्र में जुए का साम्राज्य!बीट प्रभारी के संरक्षण में पनप रहा काला कारोबार, 28 अक्टूबर को पकड़े गए नामचीन जुआरियों का अब तक नहीं हुआ खुलासा

शहडोल। (ख़बर Tap रिपोर्ट) — जैतपुर थाना क्षेत्र में जुए का धंधा खुलेआम पनप रहा है। 28 अक्टूबर 2025 को स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी कार्यवाही करते हुए कई नामचीन जुआरियों को हिरासत में लिया था। बताया जा रहा है कि इस कार्यवाही में क्षेत्र के प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के नाम भी सामने आए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी इस पूरे मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। न तो पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया और न ही गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। इससे अब यह चर्चा ज़ोरों पर है कि कहीं यह पूरा मामला बीट प्रभारी और थाना स्टाफ की मिलीभगत का तो नतीजा नहीं है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जैतपुर थाना क्षेत्र के कई गाँवों और कस्बों में लंबे समय से जुआ का कारोबार फल-फूल रहा है। आये दिन गुप्त ठिकानों पर रात भर ताश और सट्टे का खेल चलता है, लेकिन पुलिस की नाक के नीचे यह सबकुछ होते हुए भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। 28 अक्टूबर की रात को अचानक हुई छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी, ताश की गड्डियाँ और अन्य सट्टा-सामग्री बरामद की गई थी। कुछ जुआरी मौके से भागने में सफल हो गए जबकि कई लोगों को पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा था।

बताया जा रहा है कि पकड़े गए जुआरियों में क्षेत्र के कुछ नामचीन व्यापारी, ठेकेदार और प्रभावशाली लोग शामिल थे। लेकिन जैसे ही मामला बीट प्रभारी तक पहुँचा, अचानक कार्यवाही की रफ्तार धीमी पड़ गई। कई लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के छोड़ दिया गया, जबकि एफआईआर में केवल कुछ छोटे-मोटे नाम दर्ज किए गए। यह पूरा मामला अब संदेह के घेरे में आ गया है कि कहीं बीट प्रभारी ने अपनी कुर्सी बचाने और रसूखदारों के दबाव में आकर यह खेल तो नहीं खेला।

स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जैतपुर क्षेत्र में जुआ, सट्टा, अवैध शराब और अन्य गैरकानूनी गतिविधियाँ बीट प्रभारी के संरक्षण में ही चल रही हैं। जब भी कोई शिकायत की जाती है, पुलिस सिर्फ़ औपचारिक कार्रवाई करती है, लेकिन असली जड़ तक नहीं पहुँचती। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच हो, तो कई बड़े नाम उजागर हो सकते हैं जो वर्षों से इस काले कारोबार में शामिल हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बीट प्रभारी का क्षेत्र में कुछ खास लोगों से सांठगांठ है। यही कारण है कि जुआरियों को पहले से ही छापे की जानकारी मिल जाती है और वे भागने में सफल रहते हैं। पुलिस की इस मिलीभगत ने आम जनता का विश्वास तोड़ दिया है।

सवाल यह भी उठता है कि 28 अक्टूबर को हुई बड़ी कार्यवाही का अब तक खुलासा क्यों नहीं किया गया? क्या पुलिस दबाव में है या जानबूझकर मामले को दबा रही है? अगर वास्तव में कानून का राज कायम करना है, तो ऐसे अधिकारियों पर भी कार्रवाई जरूरी है जो अपराधियों को संरक्षण देकर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।

इस पूरे मामले ने न केवल जैतपुर थाना बल्कि पूरे जिले की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता चाहती है कि 28 अक्टूबर को पकड़े गए जुआरियों की सूची सार्वजनिक की जाए और उन पर ठोस कार्रवाई हो — ताकि यह संदेश जाए कि कानून सबके लिए समान है, चाहे वह आम व्यक्ति हो या प्रभावशाली चेहरा।