Updated On: 13 Nov, 2025

रसमोहनी में सड़क की मांग को लेकर भड़के ग्रामीण — तहसीलदार पहुंचे समझाने, लेकिन ग्रामीण अडिग: “कलेक्टर नहीं आएंगे तो जाम नहीं हटेगा”

जैतपुर। रसमोहनी ग्राम और सागरटोला में गुरुवार को सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। वर्षों से जर्जर पड़ी सड़क की मरम्मत न होने से परेशान ग्रामीण मुख्य मार्ग पर उतर आए और चक्का जाम कर दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा इस धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए।


ग्रामीणों ने बताया कि रसमोहनी से कोलान टोला तक की सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। जगह-जगह गड्ढे, जलभराव और कीचड़ ने लोगों का चलना मुश्किल बना दिया है। स्कूल जाने वाले बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं, मरीजों को अस्पताल ले जाना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि कई बार आवेदन और शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे नाराज होकर वे अब सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं।


धरना की सूचना मिलते ही तहसीलदार मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम हटाने की अपील की। लेकिन ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक कलेक्टर स्वयं मौके पर आकर बात नहीं करते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अब वे सिर्फ “आश्वासन और जुमलों” से नहीं मानेंगे, लिखित कार्यवाही और सड़क निर्माण की तारीख चाहिए।


धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस खराब सड़क के कारण आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। गांव के ही उपसरपंच कुछ दिन पहले इसी सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए थे और उनका पैर टूट गया था। इसके बावजूद किसी अधिकारी ने देखने तक की ज़हमत नहीं उठाई।


सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब उपसरपंच खुद टूटा हुआ पैर लेकर धरने में शामिल हुए। वे प्लास्टर चढ़े पैर के साथ व्हीलचेयर पर बैठे थे और बोले —


> “यह टूटा हुआ पैर प्रशासन की लापरवाही का सबूत है। जब तक सड़क नहीं बनेगी, यह दर्द हमें हर दिन याद दिलाता रहेगा।”


धरना के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यातायात घंटों तक बाधित रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही कलेक्टर मौके पर आकर सड़क निर्माण की ठोस घोषणा नहीं करते, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन से कौन पहुंचता है — समझाने वाला अधिकारी या फिर सिर्फ “जुमला” देने वाला।