ग्राम मड़सा के किसान लखन लाल वर्मा की धान की फसल जलकर राख
जिला शहडोल के थाना जैतपुर अंतर्गत ग्राम मड़सा में सोमवार की सुबह एक बड़ी दुर्घटना सामने आई, जिसने गांव के किसान लखन लाल वर्मा की सालभर की मेहनत को पलक झपकते ही राख में बदल दिया। बंदरों को भगाने के लिए गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा फटका (पटाखा) फोड़ने पर निकली चिंगारी खलिहान में पहुंच गई और वहां रखी धान की फसल ने अचानक आग पकड़ ली। चंद मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
घटना सुबह करीब 9 बजे की है, जब बंदरों का झुंड गांव की गलियों और खेतों में उत्पात मचा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, कई दिनों से बंदरों की संख्या बढ़ जाने से फसलों को लगातार नुकसान हो रहा था। बंदर खलिहान में घुसकर कटी हुई फसल को बर्बाद कर देते थे। इन्हीं को भगाने के दौरान किसी ग्रामीण ने फटका जलाया ताकि बंदर डरकर भाग जाएं, लेकिन दुर्भाग्यवश फटके की चिंगारी पास के उस खलिहान में जा गिरी जहां किसान लखन लाल वर्मा की धान की फसल भंडारित थी।
खलिहान में बड़ी मात्रा में सूखा भूसा और धान की बोरियां रखी थीं, जिन्होंने चिंगारी लगते ही तुरंत आग पकड़ ली। हवा की तेज़ी ने आग को और फैलाया। देखते ही देखते पूरा खलिहान लपटों से घिर गया। ग्रामीणों ने पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग की रफ्तार इतनी तेज थी कि कोई भी सामान बचाया नहीं जा सका। मात्र कुछ ही समय में किसान लखन लाल वर्मा की पूरी फसल, भूसा और लकड़ी की संरचना जलकर राख हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि आग को नियंत्रित करने में काफी दिक्कतें आईं। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई थी, लेकिन गांव दूरस्थ क्षेत्र में होने के कारण दमकल वाहन मौके पर देर से पहुंचा। जब तक सहायता पहुंचती आग अधिकांश फसल को नष्ट कर चुकी थी। आग पर आखिरकार ग्रामीणों की सहायता से नियंत्रण पाया जा सका, लेकिन तब तक नुकसान लाखों में हो चुका था।
किसान लखन लाल वर्मा ने बताया कि इस खलिहान में कई क्विंटल धान रखी हुई थी, जो परिवार की वर्षभर की मेहनत और आय का मुख्य आधार था। आग के कारण फसल के साथ कुछ कृषि उपकरण भी जलकर नष्ट हो गए। इस घटना से किसान पर भारी आर्थिक संकट आ पड़ा है और परिवार की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है।
गांव के लोगों का कहना है कि बंदरों का आतंक पिछले कुछ महीनों से बढ़ता ही जा रहा है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने के अलावा बंदर कई बार घरों में घुसकर सामान भी बिखेर देते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से कई बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आने से स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में बंदरों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी कोई और दुखद घटना न हो।
फिलहाल घटनास्थल पर सिर्फ राख और जले हुए ढांचे बचे हैं। किसान लखन लाल वर्मा अपनी जल चुकी फसल और खाक हुए खलिहान को देखकर बेहद दुखी हैं। यह घटना न केवल किसान के लिए बल्कि पूरे ग्राम मड़सा के लोगों के लिए एक चेतावनी है कि बंदरों की समस्या गंभीर है और समय रहते इसका समाधान आवश्यक है।

Leave a Reply