शहडोल की टाइपिंग गलती ने बना दिया अपराधी, सुशांत का दर्द—‘मेरी बेटी के पहले कदम भी नहीं देख पाया’
मध्य प्रदेश के शहडोल में इंसानी गलती ने इंसान की ज़िंदगी का एक साल निगल लिया। एक साधारण-सा टाइपो एरर—और 26 साल का सुशांत अचानक “खतरनाक आरोपी” बनकर जेल में बंद कर दिया गया।
अदालत ने बाद में माना कि सुशांत का कोई कसूर नहीं था, गलती सिर्फ आदेश टाइप करने वाले की थी, जिसने असली आरोपी नीरजकांत द्विवेदी की जगह सुशांत का नाम भर दिया। सबसे चौंकाने वाली बात—जिला कलेक्टर ने भी बिना जांच उस आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए और युवक सीधे NSA के तहत जेल पहुँच गया।
एक साल बाद जब सुशांत बाहर निकला… दर्द शब्दों में नहीं समाया
रिहाई के बाद सुशांत रोते हुए बोला—
“कोई मेरा वक्त लौटा देगा? 6 महीने बाद पहली बार अपनी बेटी को देखा… उसके पहले कदम भी मैं नहीं देख पाया।”
जेल में रहते हुए 13 मार्च को उसकी बेटी का जन्म हुआ। सुशांत कहता है—
“मेरी पत्नी अकेली लड़ती रही, माँ-बाप को कर्ज लेना पड़ा। एक गलती की सजा मैंने ही क्यों काटी?”
हाईकोर्ट ने दिखाई कड़ी नाराज़गी
एमपी हाईकोर्ट ने सुशांत को निर्दोष करार दिया और साफ कहा—
“इस मामले में दिमाग का इस्तेमाल ही नहीं किया गया।”
कोर्ट ने शहडोल कलेक्टर केदार सिंह को अवमानना नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि वे अपनी जेब से 2 लाख रुपये बतौर मुआवजा दें। साथ ही राज्य सरकार को भी फटकार लगाई कि बिना सत्यापन ऐसा खतरनाक आदेश कैसे लागू हो गया।
एक गलती जो किसी की ज़िंदगी उधेड़ गई
सुशांत जेल से बाहर तो आ गया, लेकिन उसका कहना है
“यह दाग अब मेरी नौकरी की उम्मीदें भी खत्म कर देगा।”
एक छोटी-सी चूक ने एक युवा पिता, एक पति और एक बेटे का पूरा साल निगल लिया—और साबित कर दिया कि सिस्टम की एक टाइपिंग गलती भी किसी परिवार को बर्बाद कर सकती है।

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