Updated On: 18 Nov, 2025

OCM हादसे का बड़ा पर्दाफाश: चेतावनी नजरअंदाज, जबरन कराया गया खतरनाक काम… एक महीना बाद भी ऑपरेटर लापता, कार्रवाई पर सवाल

OCM खदान में हुए दर्दनाक हादसे को एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब सामने आया नया वीडियो पूरे मामले को उलटी दिशा में मोड़ देता है। यह फुटेज सिर्फ हादसे से पहले का दृश्य नहीं है, बल्कि सिस्टम की सबसे खतरनाक लापरवाही का जीवंत सबूत है। वीडियो में अधिकारी साफ कहते सुनाई दे रहे हैं कि ढलान कमजोर है, पानी का फैलाव लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में किसी भी मशीन का नीचे जाना जानलेवा साबित हो सकता है। इसके बावजूद काम रोकने के बजाय ठेकेदार कंपनी ने डोजर और टीपर को आगे बढ़ाने का दबाव बनाया।


कुछ ही देर बाद वही आशंका सच्चाई बनकर सामने आई—भारी मशीनें सीधे पानी में समा गईं और टीपर ऑपरेटर अनिल कुशवाहा गहराई में फंसकर लापता हो गए। हादसे के बाद SDRF, NDRF और सेना तक को बुलाया गया, लेकिन खदान की दलदली सतह और लगातार बहते पानी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन अब तक नाकाम रहा। न मशीन मिली, न ऑपरेटर का कोई सुराग। परिवार हर दिन उम्मीद और निराशा के बीच झूल रहा है।


सबसे बड़ा विवाद प्रबंधन की कार्रवाई को लेकर है। खान प्रशासन ने केवल दो कर्मचारियों को निलंबित कर खानापूर्ति कर दी, जबकि वीडियो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि असली लापरवाही उन लोगों की थी जिन्होंने अधिकारियों की चेतावनी के बावजूद जोखिम भरा काम जारी रखा। यही वजह है कि स्थानीय लोग पूछ रहे हैं—जिनके आदेश पर काम हुआ, उन्हें बचाया क्यों जा रहा है?


इसी बीच, ठेकेदार कंपनी पर कार्रवाई न होना सबसे बड़ा संदेह पैदा करता है। अगर चेतावनी थी, हालात असुरक्षित थे और अधिकारी खुद मना कर रहे थे, तो फिर कौन-सी मजबूरी थी कि मशीनें खतरनाक हिस्से में भेजी गईं? परिजन आरोप लगा रहे हैं कि पूरे मामले को जानबूझकर धीमी जांच के जरिए ठंडे बस्ते में डाल दिया जा रहा है ताकि जिम्मेदार पक्ष तक कार्रवाई न पहुंचे।


एक महीने के इंतज़ार, दर्जनों गोताखोरों, मशीनों और रेस्क्यू टीमों के बावजूद अनिल कुशवाहा को न ढूंढ़ पाना सुरक्षा प्रबंधन की सबसे बड़ी विफलता साबित हो चुका है। सवाल अब सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का है जो चेतावनी सुनकर भी आंखें मूंद लेता है—और फिर गुमशुदा कर्मियों के परिवार को अकेला छोड़ देता है।