ब्रेकिंग स्पेशल रिपोर्ट: भूखे पेट पढ़ाई कर रहे मासूम — प्राथमिक स्कूल में 7 दिनों से नहीं बना भोजन
रसमोहनी: जनपद पंचायत बुढ़ार के संकुल साखी के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय नगबसियान टोला से एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक खबर सामने आई है।
यहां लगातार 7 दिनों से बच्चों को भोजन नहीं मिल रहा, जिसके कारण नन्हे छात्र-छात्राओं को भूखे पेट ही स्कूल से वापस घर लौटना पड़ रहा है। शिक्षा का अधिकार जहां बच्चों को कक्षा में बैठने का हक देता है, वहीं इस स्कूल की लापरवाही इस हक के बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
समूह संचालक की मनमानी — महीना भर में सिर्फ 10–15 दिन भोजन
स्कूल में भोजन व्यवस्था संभाल रहे समूह संचालक की मनमानी चरम पर बताई जा रही है।
शिक्षकों और छात्रों के अनुसार समूह संचालक महीने में सिर्फ 10 से 15 दिन ही भोजन बनवाता है।
बाकी दिनों में बच्चों को खाली पेट ही घर भेज दिया जाता है।
यह स्थिति पिछले एक हफ्ते से लगातार चल रही है, जिससे कई छोटे-छोटे बच्चे स्कूल में बैठ भी नहीं पा रहे। भूख से परेशान बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, और अभिभावक भी स्कूल प्रबंधन की इस बेरुखी से बेहद नाराज़ हैं।
शिक्षकों की बेबसी — खाद्यान्न नहीं मिल रहा, बार-बार दी सूचना
स्कूल के शिक्षकों ने साफ बताया कि उन्हें 7 दिनों से समूह की ओर से खाद्यान्न उपलब्ध ही नहीं कराया गया।
उन्होंने इस स्थिति की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेज दी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
शिक्षकों के मुताबिक:
“बच्चों को खाना न देना हमारे लिए दुखद है, लेकिन हमारे पास खाद्यान्न नहीं है तो खाना कैसे बनाएं?”
अभिभावकों का दर्द — "हमारे बच्चों का पेट भरने वाला समूह बदलिए"
स्कूल के छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
माता-पिता का कहना है कि बच्चों के भोजन के साथ खेलने वालों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
जिला प्रशासन से नया समूह संचालक नियुक्त करने की मांग की गई है ताकि बच्चों को नियमित भोजन मिल सके।
एक अभिभावक ने कहा:
“हमारे बच्चे पढ़ने आते हैं, भूखे वापस नहीं। प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करे।”
लापरवाही का काला सच — बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़
मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) योजना बच्चों को पोषण और निरंतरता से स्कूल भेजने की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था है।
लेकिन नगबसियान टोला का यह मामला दिखाता है कि जिम्मेदारों की लापरवाही और भ्रष्टचर सोच के कारण मासूम बच्चों के पेट पर चोट की जा रही है।
प्रशासन की नजर अब इस पूरे मामले पर है और जांच की तैयारी शुरू कर दी गई है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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