जनपद बुढ़ार में फर्जी बिल घोटाले पर अब तक शून्य कार्रवाई — क्या सबकी मिलीभगत?
खम्हरिया पंचायत में अवैध रेत परिवहन, फर्जी बिलिंग और भुगतान का बड़ा मामला गहराया**
पत्रकार – देवकांत मिश्रा
जनपद पंचायत बुढ़ार के खम्हरिया ग्राम पंचायत में सामने आया अवैध रेत परिवहन और फर्जी बिलों पर मोटा भुगतान का मामला अब और गंभीर हो गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे खुलासे के बाद भी अब तक किसी भी अधिकारी, सचिव या सप्लायर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इससे ग्रामीणों में यह सवाल और गहरा हो गया है कि –
क्या इस पूरे खेल में नीचे से ऊपर तक सभी की मिलीभगत है?
फर्जी बिल, अवैध भुगतान – फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
जांच में कई अनियमितताएँ सामने आने के बावजूद न तो जनपद ने नोटिस जारी किया, न कोई जांच समिति बनाई और न ही जिम्मेदारों का जवाब मांगा गया। जबकि नियमों के अनुसार—
बिना जीएसटी नंबर के भुगतान अपराध की श्रेणी में
बिना रॉयल्टी और परिवहन दस्तावेज़ रेत सप्लाई असंभव
बिना तकनीकी स्वीकृति जनपद भुगतान नहीं कर सकता
इसके बावजूद न सचिव पर कार्रवाई, न जनपद सीईओ की ओर से जवाबदेही—यह खुद इस मामले को संदेहास्पद बना देता है।
“कुलदीप लाइट फिटिंग” और “लवकुश सेंटरिंग ब्रदर्स” — रेत का काम किस आधार पर दिया गया?
जिस व्यक्ति का रेत से कोई संबंध नहीं, उसे—
11 ट्रिप रेत – ₹21,120
12 ट्रिप रेत – ₹23,040
18 ट्रिप सेंटरिंग सामग्री – ₹14,400
अन्य मद मिलाकर कुल बिल – ₹80,150 तक
का भुगतान कर दिया गया।
न जीएसटी, न रॉयल्टी, न ट्रैक्टर नंबर, न चालान — कुछ भी नहीं।
इसके बाद भी जनपद ने बिलों को ‘सही’ मानकर पूरा भुगतान पास कर दिया।
बड़ा सवाल — जब मामला खुलेआम सामने आ चुका, तो कार्रवाई कौन रोके हुए है?
ग्रामीणों का आरोप है कि—
भुगतान सचिव → इंजीनियर → जनपद अकाउंटेंट → जनपद सीईओ की स्वीकृति से होता है।
मतलब पूरा प्रसंस्करण चेन इस घोटाले में शामिल हुए बिना संभव नहीं।
लोगों का सीधा आरोप—
“अगर सबकी मिलीभगत नहीं होती, तो कार्रवाई उसी दिन हो जाती।”
पंचायत दर्पण में भी गलत प्रविष्टियाँ — फिर भी विभाग मौन क्यों?
ऑनलाइन भुगतान बिना दस्तावेज़ के पास
वर्क ऑर्डर की फाइल बिना मापन के
साइट की कोई फोटो नहीं
स्टॉक एंट्री ज़ीरो
निगरानी समिति की रिपोर्ट गायब
इतनी अनियमितताओं के बाद भी विभाग साइलेंट मोड में है।
ग्रामीणों का बड़ा आरोप — “काम जमीन पर शून्य, बिल कागज पर 100%”
ग्रामीणों का कहना है—
रेत आई ही नहीं
सेंटरिंग सामग्री भी नहीं आई
लेकिन बिल पूरी तरह पास
पैसे किसके खाते में गए — कोई रिकॉर्ड नहीं
जनपद के अधिकारियों ने शिकायतें सुनने से भी इंकार किया
यह साफ संकेत है कि मामला सिर्फ पंचायत तक सीमित नहीं, बल्कि ऊपर तक गहराई में धंसा हुआ है।
अब तक कोई कार्रवाई नहीं — क्या जनपद बुढ़ार में फर्जी भुगतान को संरक्षण?
मामला उजागर होने के 15 दिन बाद भी—
✔ न सचिव निलंबित
✔ न जनपद अधिकारी पर कार्रवाई
✔ न जांच समिति
✔ न जवाब
✔ न एफआईआर
ग्रामीणों का कहना है—
“साफ है, सबकी मिलीभगत बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं।”
जांच की मांग तेज — FIR व उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीण अब मांग उठा रहे हैं—
1. फर्जी बिलों की संपूर्ण वित्तीय जांच
2. जनपद के हर स्तर के अधिकारी की जवाबदेही तय
3. रेत परिवहन का वास्तविक रिकॉर्ड सार्वजनिक
4. पूरे भुगतान की तकनीकी जांच
5. दोषियों पर FIR
जनता का सीधा सवाल — जवाब किससे मांगे?
अगर रेत आई — तो रिकॉर्ड कहाँ है?
अगर रेत नहीं आई — तो भुगतान किसने कराया?
और अगर किसी ने नहीं कराया — तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
यह मामला सिर्फ एक पंचायत का नहीं, बल्कि जनपद बुढ़ार में लंबे समय से चल रहे “फर्जी बिल — प्रतिशतबाजी” के सिंडिकेट का संकेत देता है।

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