Updated On: 02 Dec, 2025

PMO का नाम अब ‘सेवा तीर्थ’, राजभवन बनेंगे ‘लोकभवन’ — केंद्र का ऐतिहासिक फैसला

केंद्र सरकार ने मंगलवार को देश की प्रशासनिक पहचान से जुड़े सबसे बड़े बदलावों में से एक की घोषणा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम अब ‘सेवा तीर्थ’ हो गया है, जबकि केंद्रीय सचिवालय को नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ दिया गया है। यह फैसला केवल दो संस्थानों तक सीमित नहीं है। सरकार ने देशभर के सभी राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ करने की भी औपचारिक घोषणा की है। राज निवास अब ‘लोक निवास’ के नाम से जाने जाएंगे।

सरकार का कहना है कि यह कदम औपनिवेशिक मानसिकता से छुटकारा पाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। गृह मंत्रालय ने राज्यों को भेजे गए पत्र में साफ लिखा कि ‘राजभवन’ शब्द ब्रिटिश शासन की छाया को आज भी प्रतिबिंबित करता है, इसलिए इसे बदला जाना समय की मांग है।’ पत्र में पिछले साल हुए राज्यपालों के सम्मेलन का भी उल्लेख है, जिसमें इस बदलाव पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

निर्देशों के बाद कई राज्यों ने तेजी से कार्रवाई की है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, गुजरात, ओडिशा, उत्तराखंड, त्रिपुरा और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख ने आधिकारिक रूप से अपने राजभवनों का नाम ‘लोकभवन’ या ‘लोक निवास’ कर दिया है। इस कड़ी में अब राजस्थान भी शामिल हो गया है। इन राज्यों में बोर्ड, लेटरहेड, नॉटिफिकेशन और सभी सरकारी दस्तावेजों पर नए नामों का उपयोग शुरू किया जा चुका है।

मोदी सरकार पिछले कुछ वर्षों से भारत में ब्रिटिश काल की प्रतीकों और शब्दों को बदलने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इससे पहले दिल्ली के राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया था। प्रधानमंत्री आवास का नाम भी अब लोक कल्याण मार्ग है। सरकारी वेबसाइटों पर हिंदी को प्राथमिकता दी गई है और बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में अंग्रेज़ी धुनें हटाई जा चुकी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से सरकारी पहचान अधिक भारतीय और जन-संवेदनशील बनेगी। वहीं विपक्षी दल इस कदम को प्रतीकात्मक बताते हुए ठोस प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल देशभर में इन नए नामों को लेकर चर्चा तेज है। आम जनता में भी यह बहस छिड़ गई है कि क्या ये बदलाव देश की मानसिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता को मजबूत करेंगे या केवल एक राजनीतिक संदेश भर हैं।