धान खरीदी केंद्रों में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी — वजन से लेकर वसूली तक चल रहा खुला खेल, पुराने आरोपी फिर सक्रिय
जैतपुर क्षेत्र से बड़ी खोज–खबर**
जैतपुर।
धान खरीदी सीजन की शुरुआत के साथ ही जैतपुर क्षेत्र के कई धान खरीदी केंद्रों में एक बार फिर गड़बड़ियों का भारी खेल शुरू हो गया है। किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता इस बात का संकेत है कि वर्षों से चल रही अनियमितताओं पर न तो नियंत्रण हो पाया है और न ही जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई। केंद्रों पर हो रही मनमानी, अवैध वसूली, वजन में हेराफेरी और पूर्व में रिकवरी झेल चुके प्रभारियों की नई रणनीतियाँ इस पूरे तंत्र की सच्चाई उजागर कर रही हैं।
41–42 किलो भर्ती, भुगतान सिर्फ 40 किलो — किसानों की जेब पर सीधा डाका
किसानों का सबसे गंभीर आरोप वजन में धोखाधड़ी को लेकर है। कई किसानों ने बताया कि:
धान की भर्ती 41 से 42 किलो की बोरी में की जा रही है, लेकिन भुगतान सिर्फ 40 किलो का दिया जा रहा है।
यह अंतर मामूली नहीं, बल्कि प्रति बोरी लगभग 2 किलो धान का नुकसान है। एक दिन में सैकड़ों बोरी भर्ती होती हैं, जिससे यह हेराफेरी लाखों में पहुंच जाती है। किसानों का सवाल बिल्कुल सीधा है—
“आखिर यह 2 किलो धान प्रति बोरी किसके खाते में जाता है?”
बोरी पलटी से तौल तक हर चीज़ का पैसा किसान दे – नाम खरीदी का, खर्चा किसान का
धान खरीदी केंद्रों पर जिन कामों का जिम्मा शासन के निर्देशों के अनुसार केंद्र पर होना चाहिए, उनका पूरा बोझ किसानों पर डाला जा रहा है। किसानों का कहना है कि:
बोरी पलटी का पैसा किसान से
बोरी में छपाई/छपामारी का पैसा किसान से
तौल कराने का पैसा किसान से
लोड–अनलोड का पैसा भी किसान से
यानी नियम एक, लेकिन धरातल पर व्यवस्था बिल्कुल उलट। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर हर प्रक्रिया की तय “रेट लिस्ट” बना दी गई है, जिसका पालन कराने का दबाव किसानों को सहना पड़ता है।
रिकवरी झेल चुके प्रभारियों के परिवार बने समिति सदस्य — भ्रष्टाचार का नया मॉडल?
जांच योग्य एक बेहद चौंकाने वाला पहलू यह है कि पिछले वर्षों में जिन धान खरीदी प्रभारियों पर रिकवरी की कार्रवाई की गई थी, अब उनके परिवारों और रिश्तेदारों ने खुद समूह बनाकर धान खरीदी का काम शुरू कर दिया है।
किसानों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी:
“ये तो अंधेर नगरी चौपट राजा… टके सर भाजी, टके सर खाजा!”
यह पूरा मामला इस ओर स्पष्ट संकेत देता है कि जिनके चेहरे पर पहले से ही भ्रष्टाचार का दाग था, वे अब परिवार और रिश्तेदारी के नाम पर पर्दे के पीछे से पूरा खेल चला रहे हैं।
किसानों का सवाल—
“जब कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी, तो सिस्टम में सुधार कैसे होगा?”
ऊपर तक पैसा पहुंचने के आरोप — कार्रवाई क्यों ठप?
स्थानीय किसानों का दावा है कि केंद्र प्रभारियों का नेटवर्क सिर्फ केंद्र के स्तर तक सीमित नहीं है। धान खरीदी केंद्रों से होने वाली अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा ऊपर तक पहुंचने की बात कही जा रही है, जिसके कारण:
शिकायतों पर कार्रवाई धीमी पड़ जाती है, घोटालों के आरोपी दोबारा महत्वपूर्ण पदों पर आ जाते हैं,
और किसान हर साल उसी स्थिति में फंस जाते हैं।
किसान खुले शब्दों में आरोप लगाते हैं कि “जब तक पैसा भोपाल तक जाता रहेगा, तब तक कार्रवाई कैसे होगी?”
1 सीजन में 50–60 लाख का गोलमाल?
किसानों में बढ़ रहा आक्रोश — कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
लगातार बढ़ रही समस्याओं और अनियमितताओं ने किसानों को गुस्से में ला दिया है। किसान संगठनों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही:
वजन और वसूली की स्वतंत्र जांच, दोषी प्रभारियों को हटाने, पारदर्शी तौल प्रणाली लागू करने, और अवैध वसूली बंद कराने
जैसे कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
अब देखना ये है कि जिला के डीएम कोई कड़ा उठाते है किसान लुटते रहेंगे
धान खरीदी केंद्र किसानों की उम्मीद का स्थान है, लेकिन जब वही केंद्र भ्रष्टाचार का अड्डा बन जाए तो किसान कहाँ जाए? जैतपुर क्षेत्र की यह स्थिति सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे खरीदी तंत्र की गहराई तक फैले भ्रष्टाचार का दर्पण है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है—देखना है कि कार्रवाई होती है या फिर किसानों की आवाज़ कागजों में ही दबकर रह जाती है।

Leave a Reply