समिति में अपने, खरीदी केंद्र पर कब्ज़ा — आखिर किसका अभयदान पा रहे हैं पुराने आरोपी
🌾कहीं और का समूह, कहीं और धान खरीदी
धान खरीदी सीजन शुरू होते ही एक बार फिर अजीब खेल सामने आया है।
एक जगह के लोगों ने दूसरी जगह जाकर धान खरीदी समिति बनाई।
यह व्यवस्था खुद अपने-आप में संदेह पैदा करती है कि यह क्यों और कैसे संभव हुआ?
पुराने भ्रष्टाचारियों की फिर से वापसी
जिन प्रभारियों पर पहले लाखों की रिकवरी की गई थी, वही लोग दोबारा प्रभारी या समिति सदस्य बन कर लौट आए।
नियमों के अनुसार ऐसे व्यक्तियों को वर्षों तक जिम्मेदारी से दूर रखा जाना चाहिए, परंतु यहां उल्टा हो रहा है।
🤝सेटिंग सिस्टम’ का मजबूत नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि धान खरीदी केंद्रों पर कब्जा पूरी तरह सेटिंग और संपर्कों के दम पर होता है।
एक पूरी टीम बनाई जाती है— जिसमें परिवार, रिश्तेदार और करीबी लोगों को समिति में शामिल कर दिया जाता है।
केंद्र पर वही लोग तैनात किए जाते हैं जिनका पुराना रिकॉर्ड संदेहास्पद रहा है।
💰सीजन में 50–60 लाख तक की अनियमित कमाई
नमी, वजन और गुणवत्ता में हेरफेर सबसे बड़ा खेल।
खास किसानों की ट्रालियों को विशेष प्राथमिकता, बाकी किसानों को लाइन में घंटों इंतजार।
निजी व्यापारियों को धान बेचकर पोर्टल पर फर्जी एंट्री चढ़ाने की शिकायतें भी सामने आईं।
एक सीजन में 50 से 60 लाख तक की कमाई का दावा।
🤕 किसानों का दर्द — “हमारे नाम पर चल रही लूट
किसानों को तौलाई में कटौती, नमी के नाम पर कटमार, और कई बार धान वापस लौटाने जैसे परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कई किसान बताते हैं— “हम लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन रात में सेटिंग वाले व्यापारी का धान तौला जाता है।”
🧑🤝🧑समिति गठन में खुला खेल— अपने-अपने लोग शामिल
नए समिति गठन में निष्पक्षता की बजाय प्रभारी अपने रिश्तेदारों और परिचितों को ही सदस्य बनवा रहे हैं।
यह प्रणाली समिति को निजी व्यवसाय की तरह इस्तेमाल करने जैसा है।
इससे पारदर्शिता की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
💪बड़ा सवाल — आखिर अभयदान दे कौन रहा है?
जब पुराने रिकॉर्ड में साफ-साफ गड़बड़ी दर्ज है,
जब प्रशासन के पास रिपोर्ट भी मौजूद है,
जब किसानों की शिकायतें लगातार आ रही हैं,
तो फिर इन लोगों को दोबारा जिम्मेदारी किसने और क्यों दी?
किसानों का आरोप— “ऊपर से संरक्षण मिल रहा है, तभी ये सब संभव है।”
🤫प्रशासन की निष्क्रियता से बढ़ा भ्रष्टाचार
निरीक्षण सिर्फ कागजों में दिखता है।
शिकायतें सुनकर कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति।
केंद्रों की जांच अक्सर सिर्फ फोटो क्लिक करवाकर पूरी कर दी जाती है।
❓धान खरीदी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न
कहीं और का समूह, कहीं और खरीद— यह पूरी प्रणाली में भारी खामी को दर्शाता है।
गड़बड़ियों में पकड़े गए व्यक्तियों की दोबारा तैनाती प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
किसानों और सरकार दोनों को आर्थिक नुकसान, जबकि लाभ उठाने वाले वही पुराने समूह।
👍किसानों की मांग — सख्त कार्रवाई और नई पारदर्शी व्यवस्था
दोषियों को पूरी तरह हटाया जाए।
केंद्रों पर नई टीम तैनात हो।
समिति गठन में बाहरी दबाव खत्म किया जाए।
धान खरीदी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से पारदर्शी बनाया जाए।

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