Updated On: 12 Dec, 2025

जब सईयां भय कोतवाल, तो डर कहे कि , किसानों की तरफ से धान खरीदी केंद्र जैतपुर के प्रभारी को समर्पित कविता

जिला आपूर्ति की निगरानी
आज एक सवाल बन गई,
जिसे रोकना था गड़बड़झाला,
वही इसकी दीवार बन गई।

प्रभारी को आखिर किसने दिया
ये खुला-खुला अभयदान?
बेटी ऑपरेटर, समिति अपनी,
पूरा केंद्र बना खानदान।

बाहर के समूह सिर्फ नाम के,
काम तो सब अंदर ही होता,
जैतपुर की खरीदी में
प्रभारी का हुक्म ही सबसे छोटा।

पहले रिकवरी, अब मनमानी,
न डर, न रोक, न कोई लगाम—
प्रशासन ने जैसे खुद कहा,
“डालो किसानों के हक पर ही घाम।”

लाइन में खड़ा किसान पूछे—
“कहाँ गया न्याय? किसका राज?”
धान की हर बोरी बोल उठे—
“हम हैं शिकार, ये उसका ताज।”

अंत में एक ही बात बचे—
सिस्टम जागे तो बदले हाल,
वरना जैतपुर में हर सीजन
किसानों का हक होगा नीलाम।