Updated On: 12 Dec, 2025

कोटरी अस्पताल में नोटिस का बवाल: रविवार को अस्पताल बंद, दवाइयाँ नहीं—ग्रामीण बोले "बीमारी छुट्टी नहीं लेती, अस्पताल क्यों ले रहा?"

आपातकालीन सेवाएँ, दवाइयाँ और व्यवस्था—सब सवालों के घेरे में!**

जैतपुर रोड, कोटरी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटरी में लगाए गए हालिया नोटिस ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। नोटिस के अनुसार अस्पताल सुबह 9 से दोपहर 2 बजे और शाम 5 से 6 बजे तक ही संचालित होगा। इससे भी गंभीर बात—रविवार को अस्पताल पूरी तरह बंद रहेगा। आपातकालीन स्थिति के लिए जानकारी एक निजी मेडिकल स्टोर द्वारा दी गई है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों के सवाल — “क्या सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली बैठ गई है?”
ग्रामीण खुलकर पूछ रहे हैं—
✔ जब सरकारी अस्पताल और स्टाफ मौजूद हैं, आपातकालीन मार्गदर्शन बाहर से क्यों?
✔ क्या अस्पताल में दवाइयाँ हमेशा उपलब्ध नहीं रहतीं?
✔ क्या अस्पताल केवल तय समय की औपचारिकता निभा रहा है?

ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का संकेत है।
दवाइयों की कमी और सीमित सेवाएँ—सबसे बड़ी चिंता
ग्रामीणों के अनुसार कई बार अस्पताल में दवाइयाँ नहीं मिलतीं और मरीजों को बाहर से खरीदने की सलाह दी जाती है। इससे स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े होते हैं—

दवाइयों की उपलब्धता क्यों सुनिश्चित नहीं की जाती?
क्या स्टाफ की कमी है या प्रबंधन कमजोर है?
आपातकालीन जानकारी निजी स्टोर के माध्यम से क्यों दी जा रही है?
यह पूरा मामला सरकारी हेल्थ सिस्टम की कमज़ोरियों को उजागर करता है।

रविवार को अस्पताल बंद—ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराज़गी
ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी, प्रसूति, दुर्घटना—किसी का समय तय नहीं होता। फिर सरकारी अस्पताल रविवार को कैसे बंद रह सकता है? क्या कोई गंभीर मरीज सिर्फ इसलिए परेशान होगा क्योंकि अस्पताल छुट्टी पर है? ग्रामीण इसे अनुचित और अमानवीय मानते हैं।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया — “अस्पताल जनता के लिए है, औपचारिकता के लिए नहीं”
ग्रामीणों का साफ कहना है—
“हमें डॉक्टर चाहिए, दवाइयाँ चाहिए, 24 घंटे सुविधा चाहिए।
अगर कमी है तो स्वास्थ्य विभाग सुधार करे, जिम्मेदारी किसी और पर न डाले।”

ग्रामीणों की माँग — स्वास्थ्य विभाग की व्यापक जांच हो

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं—
1. अस्पताल की सेवाओं, दवाइयों और स्टाफ की जांच हो।
2. अस्पताल के समय और सुविधाओं को नियमित किया जाए।
3. अस्पताल को 24×7 सरकारी सेवा के रूप में चालू किया जाए।

कोटरी स्वास्थ्य केंद्र का यह मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को सामने लाता है।
अस्पताल और स्टाफ मौजूद हैं,
लेकिन व्यवस्था, निगरानी और जिम्मेदारी की कमी साफ दिखती है।

अगर स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति नहीं सुधारी,
तो ग्रामीणों की मुश्किलें नहीं—उनकी ज़िंदगियाँ खतरे में पड़ेंगी।