Updated On: 16 Dec, 2025

रेत माफिया अफसर अली के आगे प्रशासन ने टेके घुटने, तितरा–कुनुक नदी में अवैध रेत का खुला साम्राज्य — धमकी भरा ऑडियो वायरल

जैतपुर | विशेष रिपोर्ट | KhabarTap

जैतपुर क्षेत्र की तितरा–कुनुक नदी इन दिनों अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का बड़ा केंद्र बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि पूरी नदी मानो रेत माफिया अफसर अली की निजी जागीर में तब्दील हो गई है। रोजाना कई-कई ट्रैक्टर और गाड़ियों से खुलेआम रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार प्रशासन आंखें मूंदे मूक दर्शक बना हुआ है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अफसर अली का इस इलाके में एकछत्र साम्राज्य चलता है। दिनदहाड़े नदी से रेत निकाली जाती है, ट्रैक्टर बेखौफ सड़कों पर दौड़ते हैं, लेकिन न तो खनिज विभाग की कोई ठोस कार्रवाई दिखाई देती है और न ही पुलिस या राजस्व अमले की सक्रियता। इससे साफ जाहिर होता है कि रेत माफिया के आगे प्रशासन ने पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं।

अवैध रेत उत्खनन से जहां नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है, वहीं जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

ख़बर के बाद बौखलाया माफिया, धमकी भरा ऑडियो वायरल

मामला यहीं नहीं रुका। क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन को लेकर खबर सामने आते ही रेत माफिया इस कदर बौखला गया कि उसने खुद अपनी ज़ुबान से पूरे अवैध नेटवर्क का खुलासा कर दिया। KhabarTap की टीम को किए गए एक धमकी भरे फोन कॉल में माफिया ने न सिर्फ अवैध रेत परिवहन की बात खुलेआम कबूली, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि एक-दो नहीं, बल्कि दस-दस गाड़ियाँ लगातार अवैध रेत ढोने में लगी हुई हैं।

इस बातचीत की ऑडियो क्लिप अब वायरल हो चुकी है, जिसने माइनिंग विभाग और जैतपुर थाना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। फोन कॉल में माफिया का लहजा पूरी तरह कानून को चुनौती देने वाला था। वह मीडिया को डराने की कोशिश करते हुए साफ शब्दों में कहता है—
“हिम्मत है तो खदान पर आओ।”

यह बयान न सिर्फ एक धमकी है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा भी है। सवाल यह है कि जिस व्यक्ति को पुलिस, माइनिंग विभाग और प्रशासन का कोई डर नहीं, उसे आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है?

ऑडियो में जिस बेखौफ अंदाज़ में अवैध रेत परिवहन की बात स्वीकार की जा रही है, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जैतपुर क्षेत्र में अवैध खनन अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। रोजाना दस गाड़ियों का संचालन यह दर्शाता है कि यह सब स्थानीय प्रशासन की जानकारी और संभावित मिलीभगत के बिना संभव नहीं।

रेत के इस अवैध खेल से शासन को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, वहीं आम जनता खुद को ठगा और असहाय महसूस कर रही है। अब देखना यह है कि इस खुलासे और वायरल ऑडियो के बाद जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और कब तितरा–कुनुक नदी को रेत माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाता है।
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