जैतपुर धान खरीदी केंद्र में अव्यवस्था चरम पर! कुड़ेली समूह– जैतपुर केंद्र प्रभारी की सेटिंग से किसानों से 41 किलो 800 ग्राम धान तक की वसूली के आरोप
जैतपुर। धान खरीदी सीजन के बीच जैतपुर का सरकारी खरीदी केंद्र एक बार फिर सवालों के घेरे में है। किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि केंद्र प्रभारी और कुड़ेली दिनेश के बीच कथित “सेटिंग–जुगाड़” तैयार किया गया है, जिसके तहत पूरा संचालन बाहरी समूहों को सौंप दिया गया है। किसानों के अनुसार इसी सांठगांठ के कारण धान खरीदी केंद्र पर भारी अनियमितताएँ सामने आ रही हैं और किसानों को योजनाबद्ध तरीके से आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
किसानों का आरोप—प्रति बोरी 41 किलो 800 ग्राम धान का वसूली खेल
स्थानीय किसानों के अनुसार उनसे 41 किलो 800 ग्राम धान प्रति बोरी के हिसाब से लिया जा रहा है और उतना धान बोरी में भरवाया जाता है। किसानों का दावा है कि यह वजन और वसूली पूरी तरह मनमानी है, जबकि सरकारी नियमों में इसका कोई प्रावधान नहीं है।
किसानों के शब्दों में—
“जो बोरी हमसे ली जाती है उसमें 41 किलो 800 ग्राम धान डलवाया जाता है। इसके बाद बोरी भराई, तौलाई और लोडिंग तक के नाम पर अलग से पैसे वसूले जाते हैं। यह सीधे-सीधे लूट है।”
ऊपर से तौलाई, लोडिंग और “छापामार शुल्क” तक की वसूली
किसानों ने बताया कि बोरी के अतिरिक्त वजन के बाद भी केंद्र प्रभारी के लोगों ने व समूह के एक व्यक्ति ने उनसे पैसे वसूले
तौलाई शुल्क
छापा मराई शुल्क
लोडिंग–अनलोडिंग शुल्क
बोरी उपलब्ध कराने का चार्ज
जैसे कई गैर-आधिकारिक वसूली कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह रकम प्रति बोरी अलग-अलग तरीके से ली जाती है, जिससे एक किसान को पूरे सीजन में हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है।
जैतपुर का स्थानीय विरोध—क्यों लाई गई बाहर की टीम?
किसानों का कहना है कि जैतपुर के लोग लंबे समय से केंद्र प्रभारी की कार्यशैली को लेकर विरोध करते रहे हैं। स्थानीय समूहों का आरोप है कि प्रभारी के रहते किसी भी अनियमितता को खुलकर करने में कठिनाई होती थी, क्योंकि स्थानीय लोग निगरानी में रहते थे और लगातार सवाल उठाते थे।
इसी वजह से, किसानों का दावा है कि प्रभारी ने “ऊपर तक सेटिंग” कर, बाहर के समूह—खासकर कुड़ेली के प्रभारी दिनेश भी समूह का पंजीयन जैतपुर धान खरीदी केंद्र के लिए करवा दिया। किसानों ने इसे एक “सुनियोजित रणनीति” बताया, ताकि स्थानीय लोगों का दबाव खत्म हो और कार्यवाही की संभावनाएँ कम हों।
बाहरी समूह का कब्जा—संपूर्ण संचालन पर नियंत्रण बनाया प्रभारी
किसानों ने बताया कि इस वर्ष धान खरीदी केंद्र पर—
ऑपरेटर
तौल-कर्मी
रजिस्ट्रेशन संभालने वाले
स्लिप प्रणाली चलाने वाले
और लोडिंग में लगे लोग
सब लोकल केंद्र प्रभारी के रिश्तेदार घर के लोग हैं किसानों का कहना है कि केंद्र पर समूह के लोग को लगभग किनारे कर दिया गया है, जिसके कारण पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो गई है।
किसानों की आवाज—“ये धान खरीदी नहीं, संगठित लूट है”
एक किसान ने कहा—
“पहले बोरी में ज्यादा धान डलवाते हैं, फिर अलग से पैसा लेते हैं और कहते हैं ‘छापा पड़ेगा तो संभाल लेंगे’। आखिर यह कौन-सा नियम है? किसान कहाँ जाए?”
किसानों ने प्रशासन और आपूर्ति विभाग पर भी सवाल उठाए कि किन परिस्थितियों में बाहर के समूहों को जैतपुर में धान खरीदी संचालित करने की अनुमति दी गई, जबकि यहां हर साल उसी केंद्र को लेकर विवाद सामने आते हैं।
स्थानीय लोगों की बड़ी शिकायत—जांच शुरू क्यों नहीं?
शिकायतों के बावजूद, किसानों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से न तो कोई सख्त निरीक्षण हुआ और न ही किसी अधिकारी ने मौके पर मौजूद रहकर स्थिति का मूल्यांकन किया।
किसानों ने पूछा—
“अनियमितताओं की शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं?”
“पंजीयन प्रक्रिया की समीक्षा क्यों नहीं की गई?”
“स्थानीय समूहों को नजरअंदाज कर बाहरी समूहों को क्यों लाया गया?”
किसानों की मांग—कुड़ेली सेटिंग पर तत्काल कार्रवाई हो
किसानों ने कलेक्टर, जिला आपूर्ति अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि—
1. पूरी पंजीयन प्रक्रिया की जांच हो।
2. धान खरीदी केंद्र के संचालन में बाहरी समूहों की भूमिका की जांच की जाए।
3. अवैध वसूली पर कठोर कार्रवाई की जाए।
4. भविष्य में स्थानीय समूहों को प्राथमिकता देकर खरीदी केंद्र की पारदर्शिता बहाल की जाए।
जैतपुर धान खरीदी केंद्र पर किसानों की ओर से लगाए गए आरोप प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हैं। यदि किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर गहरी चोट है। अब जिम्मेदार विभाग क्या कार्रवाई करते हैं—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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