जैतपुर पुलिस की नाक के नीचे अपराधियों का तांडव, रसमोहनी के मेन रोड से ज्वेलरी शॉप साफ — क्या कानून पूरी तरह फेल हो चुका है?
जैतपुर थाना क्षेत्र में अपराध अब अपवाद नहीं, बल्कि नियम बनता जा रहा है। रसमोहनी गांव में बीती रात चोरों ने जिस बेखौफ अंदाज़ में बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया, उसने पूरे इलाके की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के बाजार स्थित मेन रोड पर मौजूद विनीत ज्वेलर्स को निशाना बनाते हुए चोरों ने पहले शटर का ताला तोड़ा, फिर कांच फोड़कर दुकान के अंदर प्रवेश किया और लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात व अन्य कीमती सामान लेकर आराम से फरार हो गए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह वारदात उस जगह हुई, जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता है। भीड़भाड़ वाला बाजार, मुख्य सड़क, चारों ओर दुकानें और सीसीटीवी कैमरे—इसके बावजूद चोरों का बिना किसी डर के चोरी कर निकल जाना साफ बताता है कि अपराधियों को न कानून का खौफ है और न ही जैतपुर पुलिस का।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं। लोगों का कहना है कि हर वारदात के बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है, बयान देती है और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। न नाकेबंदी होती है, न गश्त बढ़ती है और न ही अपराधियों तक पुलिस पहुंच पाती है।
गौरतलब है कि जिस परिसर में विनीत ज्वेलर्स स्थित है, वहां ग्रामीण बैंक समेत लगभग 6 अन्य दुकानें भी मौजूद हैं। इसी बैंक में कुछ वर्ष पहले कट्टे की नोक पर डकैती की सनसनीखेज वारदात हो चुकी है, लेकिन उस मामले में भी आज तक कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हो सका। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि जब बैंक लूट के आरोपी नहीं पकड़े गए, तो ज्वेलरी चोरी के आरोपियों से क्या उम्मीद की जाए?
कुछ दिन पहले हुई चोरियों के बाद पुलिस ने ग्रामीणों को सलाह दी थी कि “घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाएं, बाउंड्री वॉल बनवाएं और सतर्क रहें।” लेकिन अब जब मेन रोड पर, बाजार के बीच, कैमरों से घिरी दुकान में शटर तोड़कर चोरी हो रही है, तो जनता पूछ रही है—अब और क्या किया जाए? क्या आम आदमी अपनी सुरक्षा खुद संभाले या अपने दुकानों की सुरक्षा के लिए किले बनवाए?
लगातार चोरी की घटनाओं से रसमोहनी सहित आसपास के गांवों में डर, गुस्सा और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अपराधियों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें पता है कि जैतपुर में कानून नाम की चीज़ सिर्फ फाइलों तक सीमित है। पुलिस की गश्त कागजों में दिखाई देती है, सड़कों पर नहीं।
यह वारदात सिर्फ एक ज्वेलरी शॉप की चोरी नहीं है, बल्कि जैतपुर पुलिस की लापरवाही, निष्क्रियता और विफलता का बड़ा सबूत है। अब देखना यह होगा कि इस बार भी पुलिस केवल औपचारिक जांच और बयानबाजी तक सीमित रहती है या फिर कोई ठोस कार्रवाई कर अपराधियों पर लगाम लगाती है। अगर जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा और अपराधियों के हौसले और ज्यादा बुलंद होते चले

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