सराफा व्यापारी की दुकान का कांच तोड़ लाखों की चोरी, रसमोहनी में दूसरी सबसे बड़ी वारदात से दहशत
रसमोहनी | विशेष रिपोर्ट
रसमोहनी में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें न कानून का डर है, न पुलिस का। ताजा मामला रसमोहनी बाजार का है, जहां सराफा व्यापारी की दुकान का कांच तोड़कर चोरों ने लाखों रुपये के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। इस वारदात को इलाके की पिछले 2–3 वर्षों की दूसरी सबसे बड़ी चोरी माना जा रहा है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में डर और आक्रोश का माहौल है।
रात के सन्नाटे में हुई इस चोरी ने साफ कर दिया है कि अपराधी पूरी तैयारी और रेकी के साथ वारदात को अंजाम दे रहे हैं। दुकान का कांच तोड़कर भीतर घुसना और कीमती आभूषणों को समेटकर फरार हो जाना, यह सब साधारण चोरों का काम नहीं, बल्कि किसी संगठित गिरोह की ओर इशारा करता है।
कट्टे की नोंक पर हुई पुरानी चोरी, आज तक नहीं हुआ खुलासा
स्थानीय लोगों को आज भी याद है कि 2–3 साल पहले रसमोहनी में कट्टे की नोंक पर बड़ी चोरी की वारदात हुई थी। उस समय भी इलाके में भारी दहशत फैली थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक उस मामले का न खुलासा हुआ, न ही अपराधी पुलिस की गिरफ्त में आए।
अब एक बार फिर बड़ी चोरी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि
👉 जब पुरानी वारदातों में अपराधी नहीं पकड़े गए, तो क्या नई वारदातों को खुला न्योता नहीं मिला?
कब तक डर में जिंदा रहेंगे रसमोहनी के लोग?
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से रसमोहनी के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
👉 कब तक लोग रात में चैन की नींद सो पाएंगे?
👉 क्या अपराधी अब किसी और बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं?
व्यापारी वर्ग में खासा डर है। सराफा दुकान में हुई चोरी के बाद कई दुकानदारों ने रात में दुकान खोलने और बंद करने तक में डर महसूस करने की बात कही है।
चोरी अब अपवाद नहीं, रसमोहनी में बन गया है नियम
रसमोहनी में चोरी अब कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं रही, बल्कि यह एक खतरनाक सिलसिला बन चुकी है।
कहीं घरों के ताले टूट रहे हैं,
कहीं दुकानों को निशाना बनाया जा रहा है,
कहीं बैंक और एटीएम के आसपास संदिग्ध हलचल,
तो कहीं खड़ी गाड़ियों से डीजल चोरी।
इतनी चोरियों का आज तक क्यों नहीं हुआ खुलासा?
यह सवाल अब आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों के मन में भी उठ रहा है कि
👉 इतनी चोरी की घटनाओं का आज तक खुलासा क्यों नहीं हुआ?
👉 क्या पुलिस जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है?
सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में न तो सीसीटीवी फुटेज को गंभीरता से खंगाला गया और न ही पुराने मामलों को जोड़कर किसी बड़े गिरोह तक पहुंचने की ठोस कोशिश की गई।
बीट प्रभारी “चाय के शौकीन”, तो चोरों की रातें क्यों न हों रंगीन?
इलाके में बीट प्रभारी को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि
> “बीट प्रभारी गश्त कम और चाय की दुकानों पर बैठना ज्यादा पसंद करते हैं।”
अगर रात में पुलिस की मौजूदगी सिर्फ कागजों में रहेगी, तो जाहिर है कि
👉 चोरों की रातें रंगीन होंगी और वारदातें बढ़ेंगी।
लोग सवाल कर रहे हैं कि
रात की गश्त कहां है?
चोरी के बाद इलाके में नाकाबंदी क्यों नहीं होती?
संदिग्ध लोगों पर नजर क्यों नहीं रखी जाती?
आखिर किसके सह में हो रहा यह सब?
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही है कि
👉 आखिर किसके सह में रसमोहनी में अपराध फल-फूल रहा है?
बिना किसी संरक्षण या लापरवाही के इतने लंबे समय तक चोरी का सिलसिला चलना आसान नहीं। लोगों का मानना है कि कहीं न कहीं सिस्टम की चुप्पी अपराधियों को ताकत दे रही है।
अब भी नहीं जागा प्रशासन, तो बड़ी वारदात तय
रसमोहनी के हालात प्रशासन के लिए खुली चेतावनी हैं। अगर अब भी
सख्त कार्रवाई,
नियमित रात्रि गश्त,
पुरानी चोरियों का खुलासा,
और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ी और खतरनाक वारदात से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह है कि
👉 पुलिस-प्रशासन जागता है
या
👉 रसमोहनी यूं ही अपराधियों के हवाले छोड़ दी जाती है।
(ख़बर सूत्रों व स्थानीय नागरिकों से प्राप्त जानकारी पर आधारित)

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