चन्नौड़ी धान खरीदी केंद्र बना लूट का कंट्रोल रूम, मुख्यमंत्री के आगमन में गूंजेगा घोटाला सचिव पुत्र त्रिभुवन का दबदबा, केंद्र प्रभारी व खाद्य आपूर्ति अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में
चन्नौडी
सरकारी धान खरीदी के नाम पर चन्नौडी केंद्र अब अव्यवस्था नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है। यहां किसान लुट रहा है, बिचौलिया फल-फूल रहा है और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग चुप्पी साधे हुए हैं। पूरे मामले के केंद्र में समूह सचिव का पुत्र त्रिभुवन बताया जा रहा है, जो बिना किसी अधिकार के खरीदी व्यवस्था पर पूरा नियंत्रण जमाए बैठा है।
सचिव पुत्र का दबदबा, नियमों की खुलेआम अनदेखी
किसानों के आरोप बेहद गंभीर हैं—
किसानों से अवैध रूप से पैसे की मांग
व्यापारियों का धान बिना छनाई सीधे पास
खराब व अमानक धान की जानबूझकर खरीद
नियम किसानों पर सख्त, व्यापारियों पर मेहरबान
अध्यक्ष की चुप्पी और फिर बयान… जिसने खुद खोल दी सच्चाई
जब खबरTAP की टीम ने समूह अध्यक्ष से किसानों के आरोपों पर जवाब चाहा, तो पहले तो उन्होंने चुप्पी साध ली। किसानों द्वारा पैसे मांगे जाने के सवाल पर अध्यक्ष कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
इसके बाद अध्यक्ष ने दावा किया कि केंद्र में 200 लेबर लगाए गए हैं, और यह लेबर किसानों के हैं, न कि सोसाइटी के।
लेकिन जब उनसे पूछा गया की
“अगर 200 लेबर हैं, तो किसान खुद ट्रैक्टर से धान क्यों उतार रहे हैं?”
इस पर अध्यक्ष का जवाब था—
“अभी लेबर आए नहीं हैं, वो 200लेबर रात में काम करते है आखिर वो रात में क्या काम करते हैं क्या रात में व्यापारियों के धान खपया जाता है क्या किसी फैक्ट्री में 200लेबर काम करते है तो फिर अध्यक्ष ने झूठा बयान क्यों दिया
यह बयान कई सवाल खड़े करता है—
जब दोपहर 3 बजे तक भी लेबर नहीं आए, तो आखिर वे आते कब हैं?
और अगर लेबर हैं ही नहीं, तो 200 लेबर होने का दावा किस आधार पर किया गया?
मजदूरों से बातचीत में साफ हुआ झूठ
जब खबरताप की टीम ने मौके पर ट्रैक्टर से धान उतार रहे
मजदूरों से बात की, तो पूरी कहानी सामने आ गई। मजदूरों ने साफ कहा—
“हम किसान की तरफ से आए हैं, सोसाइटी की तरफ से नहीं।”
इस बयान ने अध्यक्ष के 200 लेबर वाले दावे की पूरी तरह पोल खोल दी।
व्यापारियों को पूरी छूट, किसानों पर सख्ती
केंद्र पर चल रहा खेल पूरी तरह सुनियोजित है—
व्यापारियों को पहले से छपा लगा बोरी
घर पर ही सिलाई और तौल
ट्रकों में भरकर धान लाना
बाहर ट्रक रोककर ट्रैक्टर से किसान के नाम पर एंट्री
जबकि असली किसान का धान थोड़ा भी खराब हुआ तो लौटा दिया जाता है।
न सुविधा, न पारदर्शिता
सरकारी गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां—
फास्ट ट्रैक बॉक्स नहीं
बैठने, पानी, छाया की व्यवस्था नहीं
पारदर्शी गुणवत्ता जांच का अभाव
सीसीटीवी नहीं, क्यों?
सबसे बड़ा सवाल— अब तक
सीसीटीवी कैमरा क्यों नहीं लगाया गया?
किसानों का सीधा आरोप है कि अवैध तौल, धान की अदला-बदली और बाहरी व्यापारियों की एंट्री छुपाने के लिए जानबूझकर कैमरे नहीं लगाए गए।
सर्वेयर की मनमानी वसूली और तौल में घोटाला
सर्वेयर द्वारा 300 रुपये की अवैध मांग
पैसे न देने पर धान पास न होने की शिकायत
कहीं 41 किलो 300 ग्राम, कहीं 40 किलो 900 ग्राम तौल
किसानों की साफ मांग
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मांग की है—
सचिव पुत्र त्रिभुवन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच
अध्यक्ष के झूठे बयानों पर कार्रवाई
तत्काल सीसीटीवी कैमरा स्थापना
सर्वेयर पर एफआईआर
तौल और स्टॉक का मिलान
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो चन्नौडी धान खरीदी केंद्र का यह मामला जिले का सबसे बड़ा किसान शोषण घोटाला बनकर सामने आएगा।
अब सवाल साफ है— प्रशासन जागेगा या बिचौलियों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा? 🚨🌾

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