7 दिन तक खामोश रही पुलिस, कुएं से निकली लाश ने खोली व्यवस्था की पोल
केशवाही में युवक की संदिग्ध मौत, गुस्से में उफना गांव – “अगर वक्त पर ढूंढते, तो आज जिंदा होता!”
शहडोल | केशवाही (पकरिया गांव)
केशवाही एक बार फिर खून और खामोशी के बीच फंस गया है। पिछले 7 दिनों से लापता युवक शिवपाल भरिया का शव जब गांव के कुएं से निकला, तो सिर्फ एक लाश नहीं मिली—पुलिस की लापरवाही, सिस्टम की संवेदनहीनता और कानून-व्यवस्था की नाकामी भी सतह पर आ गई।
शव मिलते ही गांव में मातम नहीं, बल्कि आक्रोश का विस्फोट हुआ। परिजन फूट-फूटकर रोते रहे और ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। एक ही सवाल हर जुबान पर था—
👉 “7 दिन तक पुलिस क्या सोती रही?”
🚨 गुमशुदगी दर्ज, फिर भी तलाश नदारद
परिजनों का आरोप है कि शिवपाल के लापता होने की सूचना समय पर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने न तो गंभीरता दिखाई, न ही खोजबीन की।
अगर शुरुआती 48 घंटे में कार्रवाई होती, तो शायद आज यह खबर मौत की नहीं, बचाव की होती।
😡 कुएं से शव निकालने से इनकार, प्रशासन मुर्दाबाद के नारे
गुस्साए ग्रामीणों ने शव को कुएं से बाहर निकालने से साफ इनकार कर दिया।
मौके पर “पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद”, “न्याय दो” के नारे गूंजते रहे।
हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
⚖️ पूर्व विधायक सुनील सराफ पहुंचे, तब जाकर टूटा गतिरोध
स्थिति बेकाबू होती देख कोतमा विधानसभा के पूर्व विधायक सुनील सराफ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया—
“न्याय मिलेगा, दोषी बचेंगे नहीं।”
इस आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने शव बाहर निकालने की अनुमति दी।
❓ सवाल जो सिस्टम से जवाब मांगते हैं
🔴 7 दिन तक पुलिस की तलाश कहां थी?
❗ क्या यह आत्महत्या है या सुनियोजित हत्या?
🚨 बलबहारा दोहरे हत्याकांड के बाद भी सुरक्षा के दावे क्यों खोखले?
⚖️ केशवाही में आखिर कब सुधरेगी कानून व्यवस्था?
🩸 केशवाही में डर का माहौल, भरोसा टूटा
लगातार हो रही घटनाओं ने गांव को दहशत में डाल दिया है।
आज सवाल सिर्फ शिवपाल की मौत का नहीं, हर आम आदमी की सुरक्षा का है।
👉 क्या केशवाही अब सुरक्षित नहीं रहा?
👉 क्या लापरवाही की कीमत जान देकर चुकानी पड़ेगी?
👉 जिम्मेदारी कौन लेगा?

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