Updated On: 27 Jan, 2026

शिकायतें, मौतें, गंदगी… फिर भी चुप्पी! शहडोल मेडिकल कॉलेज बना प्रशासन की नाकामी का स्मारक

शहडोल मेडिकल कॉलेज आज इलाज के लिए नहीं, बल्कि बीमारी, गंदगी और लापरवाही देखने के लिए जाना जा रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यहां दवा कराने आने वाला मरीज पहले से ज्यादा बीमार होकर निकलने को मजबूर है। यह अस्पताल अब स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि संक्रमण फैलाने का अड्डा बन चुका है।

वॉर्डों की स्थिति किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर दे। वॉशरूम की गंदगी ऐसी कि वहां कदम रखते ही उल्टी आने लगे। फ्लश काम नहीं करते, सफाई नाम की कोई चीज़ नहीं। पूरे वॉर्ड में सिर्फ एक तरफ का वॉशरूम खुला है, उसमें भी केवल दो बाथरूम चालू, बाकी पर ताले। न लाइट, न सुरक्षा। अंधेरे में अगर कोई मरीज गिर जाए, तो खून बाद में निकलेगा, पहले गंदगी उसके शरीर और मुंह में जाएगी।

बेड खुद बीमार पड़े हैं—टूटे पलंग, फटे गद्दे, जंग लगी टेबलें। लिफ्ट में बटन खराब हैं और अंदर गुटखा, बीड़ी, सिगरेट के निशान साफ दिखते हैं। सवाल यह नहीं कि यह सब कैसे हो रहा है, सवाल यह है कि कौन देख रहा है और फिर भी चुप है?

कुछ दिन पहले इसी अस्पताल परिसर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी, जब एक मासूम बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोच खाया। यह घटना खबरों में आई, लोगों का गुस्सा भी दिखा, लेकिन कुछ दिनों बाद सब शांत।

न सुरक्षा व्यवस्था बदली, न किसी जिम्मेदार की जवाबदेही तय हुई। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं थी, बल्कि अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही का जीता-जागता सबूत थी।


यह पहली बार नहीं है। कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ की बदतमीज़ी के कई वीडियो पहले भी वायरल हो चुके हैं। यानी समस्या नई नहीं, बल्कि पुरानी और संरक्षित है। इतने खुलासों के बाद भी अगर कुछ नहीं हो रहा, तो साफ है कि यहां बड़े और रसूखदार लोगों का हाथ है।

आज हालात यह हैं कि तमाम शिकायतें सामने हैं, सब कुछ दिख रहा है, फिर भी चुप्पी पसरी है। और यही चुप्पी प्रशासन के घमंड को और ऊंचा कर रही है। उन्हें भरोसा हो गया है कि—

“कोई क्या ही कर लेगा, आज तक क्या हुआ है?”

और सच कड़वा है—

आज तक कुछ नहीं हुआ।

आप चाहें तो इस खबर को भी आज पढ़कर इग्नोर कर दीजिए।

जैसे पहले की खबरें की थीं, वैसे ही इसे भी भूल जाइए।

आवाज़ तब उठाइएगा जब आपका अपना कोई इस अस्पताल में भर्ती होगा।

तब सोशल मीडिया पर रोइएगा, चिल्लाइएगा, सिस्टम को कोसिएगा।

लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होगी।

शहडोल मेडिकल कॉलेज आज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही, सिस्टम की संवेदनहीनता और समाज की चुप्पी का आईना बन चुका है।

अगर आज भी सवाल नहीं उठे, तो कल जवाब मांगने का हक भी कमजोर पड़ जाएगा।