Updated On: 03 May, 2026

जैतपुर में अवैध रेत का ‘काला साम्राज्य’ — प्रशासन की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल, जल्द होगा बड़ा खुलासा कितने लोगों ने बना रखा दबदबा किन किन नामों से लोगों को डराया धमकाया जाता है जल्द बड़े खुलासे कौन दे रहा है संरक्षण

जैतपुर क्षेत्र आज अवैध रेत कारोबार के ऐसे जाल में फंस चुका है, जहां कानून की मौजूदगी के बावजूद नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नदियों और घाटों से रात-दिन रेत का अवैध उत्खनन, गांव-गांव में उसका भंडारण और फिर ट्रैक्टर व हाइवा के जरिए खुलेआम परिवहन—यह पूरा खेल अब किसी छुपे राज की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम ‘सिस्टम’ बन चुका है।
सबसे बड़ा सवाल—जब खनिज विभाग, राजस्व अमला और पुलिस तीनों सक्रिय होने चाहिए, तो आखिर यह कारोबार इतनी निर्भीकता से कैसे चल रहा है? स्थानीय लोगों में गुस्सा है, और उनके सवाल सीधे प्रशासन की कार्यशैली पर हैं। “क्या प्रशासन अनजान है, या जानकर भी आंखें मूंदे बैठा है?”—यह सवाल अब हर चौपाल और गली में गूंज रहा है।
सूत्र बताते हैं कि जैसे ही कार्रवाई की तैयारी होती है, अवैध कारोबारियों तक सूचना पहले ही पहुंच जाती है। नतीजा—रेड से पहले ही गाड़ियां गायब, स्टॉक सुरक्षित और मौके पर पहुंचकर टीम के हाथ खाली। यह महज संयोग नहीं हो सकता। ऐसे में सिस्टम के भीतर से ही सूचना लीक होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कार्रवाई की तस्वीर भी सवालों के घेरे में है। कहीं औपचारिक छापेमारी, तो कहीं सिर्फ छोटा छोटी कार्रवाई कर मामला शांत—जबकि असली ‘बड़े चेहरे’ अब भी बेखौफ मैदान में हैं। यही वजह है कि आम जनता का भरोसा लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
यह मामला सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं है—यह राजस्व हानि, पर्यावरणीय क्षति और कानून व्यवस्था पर सीधा असर डाल रहा है। यदि समय रहते इस पर कड़ी, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
अब सवाल जवाब मांग रहे हैं—
कौन चला रहा है इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड खेल?
किन-किन घाटों से हो रहा है अवैध उत्खनन?
कितने ट्रैक्टर और हाइवा रोज इस धंधे में लगे हैं?
कहां-कहां जमा है अवैध रेत का विशाल स्टॉक?
और किस ‘रेट सिस्टम’ पर चल रहा है यह काला कारोबार?
इन तमाम सवालों का पर्दाफाश—अगले अंक में एक बड़े खुलासे के साथ।
बने रहिए… क्योंकि जैतपुर का यह सच, पूरे सिस्टम को आईना दिखाने वाला है।