छात्रों के आंदोलन में अन्ना हजारे की एंट्री, मौन प्रदर्शन के दौरान हुए भावुक, छलक पड़े आंसू
दिल्ली में जारी छात्रों के आंदोलन को अब देश के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का समर्थन मिल गया है। महाराष्ट्र के शिरडी में आयोजित मौन आंदोलन में शामिल होकर अन्ना हजारे ने छात्रों की मांगों के प्रति अपना नैतिक समर्थन व्यक्त किया। खराब स्वास्थ्य के बावजूद आंदोलन स्थल पर पहुंचे अन्ना हजारे उस समय भावुक हो गए, जब प्रदर्शन के दौरान छात्रों की स्थिति और उन पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया गया। इस दौरान वह अपने आंसू नहीं रोक सके और फफक-फफक कर रो पड़े।
शिरडी के वाडिया पार्क स्थित गांधी मेमोरियल में यह मौन आंदोलन आयोजित किया गया था। अन्ना हजारे कुछ समय तक आंदोलन स्थल पर मौजूद रहे। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वह ज्यादा देर नहीं रुक सके, लेकिन उनकी मौजूदगी ने प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा दिया। उनके जाने के बाद भी मौन आंदोलन जारी रहा।
छात्रों के आंदोलन की शुरुआत के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में लगातार सवाल उठाए जा रहे थे कि जन आंदोलनों के लिए पहचाने जाने वाले अन्ना हजारे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। अब मौन प्रदर्शन में शामिल होकर उन्होंने इन सवालों का जवाब दे दिया है। इससे पहले अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की थी।
अपने पत्र में अन्ना हजारे ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों के असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में न देखा जाए। इसे समाज की पीड़ा, युवाओं की चिंता और उनकी अपेक्षाओं से जोड़कर समझने की जरूरत है।
अन्ना हजारे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगने पर सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि इससे प्रशासन की जवाबदेही और प्रभावशीलता बढ़ेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, भरोसे का माहौल बनाने और सकारात्मक बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।
अन्ना हजारे की आंदोलन में एंट्री के बाद छात्रों के प्रदर्शन को नया नैतिक समर्थन मिला है। उनका भावुक वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा हो रही है।

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