दूषित कफ सिरप पर WHO की नजर, भारत ने दी सफाई — कहा, जहरीली दवा देश से बाहर नहीं गई
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को उस मामले पर विस्तृत जवाब भेज दिया है, जिसमें मध्य प्रदेश में जहरीली कफ सिरप से बच्चों की मौत की खबर सामने आई थी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बताया है कि देश में तीन कफ सिरप दूषित पाए गए हैं, लेकिन इनमें से कोई भी सिरप भारत से बाहर निर्यात नहीं किया गया है।
CDSCO के मुताबिक, जिन कंपनियों की दवाएं संदिग्ध मिलीं, उनमें तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स, गुजरात की रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स और शेप फार्मा प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। तीनों की कफ सिरप — कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश टीआर और रीलाइफ — में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा अत्यधिक पाई गई, जो शरीर के लिए बेहद जहरीला रसायन है।
सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन कंपनियों की दवाओं की बिक्री और उत्पादन दोनों पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि दूषित बैच केवल देश के भीतर ही वितरित किए गए थे, किसी अन्य देश को निर्यात नहीं हुए।
WHO ने भारत से इस घटना पर जवाब 1 अक्टूबर को मांगा था, जिसके बाद 8 अक्टूबर को रिपोर्ट भेज दी गई। मंत्रालय ने कहा कि देशभर में फैक्ट्रियों और दवा उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण शुरू कर दिया गया है — खासतौर पर मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल और उत्तराखंड में।
मामले की शुरुआत तब हुई जब मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप पीने के बाद 20 बच्चों की मौत हो गई थी। जांच में सिरप में 48.6% तक DEG पाया गया। इसी रसायन के कारण कई देशों में पहले भी दर्जनों मौतें हो चुकी हैं।
सरकार ने कहा कि दवा निर्माताओं की जवाबदेही तय की जा रही है, और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। श्रीसन फार्मा के मालिक एस. रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी कंपनियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।

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