Updated On: 09 Oct, 2025

"CJI गवई ने तोड़ी चुप्पी: सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने वाली घटना पर बोले — ‘अब ये मेरे लिए खत्म हो चुका अध्याय है’"

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने आखिरकार उस घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है, जिसने सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को हिला दिया था।
बीते सोमवार को अदालत के भीतर हुई जूता फेंकने की घटना पर अब CJI ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा — “जो कुछ हुआ, वह बेहद दुखद था, लेकिन मेरे लिए अब वो एक भूला हुआ अध्याय है।”
उनका ये बयान तब आया, जब कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से बातचीत के दौरान इस मुद्दे का ज़िक्र हुआ।

गवई ने कहा कि सोमवार की घटना से वह और उनके साथी न्यायाधीश बेहद स्तब्ध और निराश थे।
हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए उन्होंने कोई कानूनी कदम न उठाने का फैसला किया — और यही वजह थी कि आरोपी वकील राकेश किशोर (71) के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ।

लेकिन इस फैसले से हर कोई सहमत नहीं था।
न्यायमूर्ति उज्जल भुइया, जो उस पीठ का हिस्सा थे, इस घटना से बेहद नाराज दिखे।
उन्होंने साफ कहा — “वह भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं, यह कोई मजाक नहीं है। इस तरह का व्यवहार संस्था का अपमान है और इसके लिए खेद नहीं जताया जा सकता।”

इसी दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आरोपी का यह कृत्य क्षमायोग्य नहीं है, और वह केवल मुख्य न्यायाधीश की उदारता की वजह से बच गया।

घटना 6 अक्टूबर की सुबह की है, जब सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में सुनवाई के दौरान वकील राकेश किशोर ने अचानक अपना जूता उतारकर CJI गवई की ओर फेंकने की कोशिश की।
मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया।
हालांकि, राकेश किशोर ने मीडिया में भी अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं जताया।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उसे निलंबित कर दिया है।
वहीं, अब CJI के इस बयान के बाद साफ है कि अदालत आगे इस मुद्दे को नहीं खींचना चाहती — लेकिन न्यायपालिका की गरिमा पर लगा ये दाग जल्दी मिटने वाला नहीं।