Updated On: 11 Oct, 2025

सत्ता सड़क पर, 24 घंटे बीते लेकिन प्रशासन खामोश , केशवाही में बढ़ा जनाक्रोश

शहडोल ज़िले के केशवाही में दुर्गा विसर्जन के दौरान 3 अक्टूबर को हुए पथराव ने इलाके की फिज़ा बदल दी है। पथराव की चिंगारी धीरे-धीरे भड़कती रही और आखिरकार 10 अक्टूबर को यह गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सैकड़ों लोगों ने शहडोल कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

लेकिन अब प्रदर्शन को पूरे 24 घंटे बीत चुके हैं, और प्रशासन की ओर से न तो कोई प्रतिक्रिया आई है, न कोई ठोस कदम। यह चुप्पी लोगों के गुस्से को और गहरा कर रही है।

लोगों का कहना है कि 3 अक्टूबर की घटना के बाद से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, मगर पुलिस ने कार्रवाई का रुख उल्टा पीड़ितों की ओर कर दिया। इससे नाराज़ होकर भीड़ ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। “एसपी मुर्दाबाद” और “केशवाही एसआई को हटाओ” जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि अब सहनशक्ति की सीमा पार हो चुकी है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि भाजपा के तीनों विधायक और संगठन पदाधिकारी खुद जनता के साथ सड़क पर उतर आए। सत्ता में होने के बावजूद उन्हें प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग करनी पड़ी। जनता में सवाल उठ रहा है — जब सरकार और विधायक दोनों सत्ता में हैं, तो फिर जवाबदेही कौन तय करेगा?

24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक मौन ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अफसरशाही अब जनता और उनके प्रतिनिधियों दोनों की बात सुनना बंद कर चुकी है? या फिर यह चुप्पी किसी दबाव का संकेत है?

केशवाही का मामला अब सिर्फ धार्मिक विवाद नहीं रहा। यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और शासन की विश्वसनीयता दोनों की असली परीक्षा बन गया है। जनता की निगाहें अब सिर्फ एक जवाब पर टिकी हैं — कब मिलेगा न्याय, और कौन देगा जवाब?